GST में फ़ेरबदल: कितनी राहत, कितनी आफत

जीएसटी काउंसिल ने पिछले हफ्ते हुई अपनी बैठक में बड़ा फ़ैसला किया और सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया. अब तक इस पर 12 फ़ीसदी जीएसटी लगता था.

इसके साथ ही कई सामानों पर जीएसटी रेट्स में कमी की गई है और अब सिर्फ़ 35 उत्पाद ही ऐसे बचे हैं जो सबसे अधिक 28 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में हैं. सीमेंट, वाहन कलपुर्जे, टायर, मोटर वाहन, विमान, एरेटेड ड्रिंक्स, तंबाकू, सिगरेट, पान-मसाला जैसी चीजें ही अब इस स्लैब में हैं. एक साल पहले जीएसटी जब लागू हुआ था इस स्लैब में 226 उत्पाद थे.

जीएसटी हड़बड़ी में लागू हुआ था या इसमें गड़बड़ी थी, ये ठीक-ठीक कहना तो मुश्किल है, लेकिन पिछले एक साल के दौरान जीएसटी काउंसिल ने 191 वस्तुओं पर से टैक्स घटाया है.

जीएसटी के दायरे में 1300 से अधिक उत्पादों और 500 से अधिक सेवाओं को लाया गया. इन्हें चार टैक्स स्लैब में बांटा गया- 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत

क्या है जीएसटी

जीएसटी का पूरा नाम गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी वस्तु एवं सेवा कर है. यह केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए गए 20 से अधिक इनडायरेक्ट टैक्स के बदले लगाया गया.

इसके लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम (एसएडी), वैट/सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन टैक्स, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, लक्ज़री टैक्स खत्म हो गए.

जीएसटी के तहत वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन तरह के टैक्स वसूले जाते हैं. पहला सीजीएसटी, यानी सेंट्रल जीएसटी, जो केंद्र सरकार वसूलती है.

दूसरा एसजीएसटी, यानी स्टेट जीएसटी, जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलती है. और तीसरा उस कारोबार पर जो दो राज्यों के बीच होगा तो उस पर आईजीएसटी, यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी वसूला जाता है. इसे केंद्र सरकार वसूल करती है और उसे दोनों राज्यों में बांट देती है.

जीएसटी की कहानी

1954 में फ्रांस ने इसे सबसे पहले लागू किया और आज ये दुनिया के 150 से अधिक देशों में लागू है. भारत में इसकी गंभीर कोशिश 2003 में शुरू हुई.

एक टास्क फोर्स के निष्कर्ष में जीएसटी का पहला स्वरूप सामने आया जिसमें राज्यों के लिए 7 फीसदी और केंद्र के लिए 5 फीसदी टैक्स रेट की बात थी. साल 2007 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अप्रैल 2010 से जीएसटी लागू करने की घोषणा की और एंपावर्ड कमिटी बनाई.

2009-10 में तेरहवें वित्त आयोग ने अपनी सिफारिशों में जीएसटी के लिए गुंजाइश बनाई.

2011 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी के लिए संविधान संशोधन बिल पेश किया. तब मौजूदा प्रधानमंत्री और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका तीखा विरोध किया था.

यूपीए की सरकार 2014 के चुनाव आने तक जीएसटी बिल पर सहमति नहीं बना पाई और बिल लैप्स हो गया. वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में नरेंद्र मोदी सरकार ने जीएसटी पर नए सिरे से प्रयास किए और इस तरह जीएसटी साकार हुआ.

सौजन्य से: बीबीसी न्यूज

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