राष्ट्रपति सम्मान को सामान में न बदलो

40 साल से देश में बाल मजदूरी कर रहे बच्चों पर जब सरकार की नजर नहीं पड़ी तो और कैलाश सत्यार्थी नामक एक व्यक्ति ने यह बीड़ा उठाया तो सरकार की उस पर भी नजर नहीं पड़ी, न ही उसे कभी किसी सम्मान के काबिल समझा और न ही उसके काम की सराहना की, लेकिन उसी कैलाश को दुनिया ने नोबेल से नवाजा। ऐसे कई उदाहरण आपको आसानी से मिल जायेंगे। जब से देश का सिस्टम सौदेबाजी से चलने लगा है तब से देश में ईमानदारी, बहादुरी, और देश सेवा की इच्छाशक्ति लिए हजारों सरकारी अधिकारी उपेक्षा के शिकार होते चले गए। इनकी परख करने वाला, इनको प्रोत्साहित करने वाले नहीं हैं। क्योंकि यह सवाल हर बार सामने आकर खड़ा तब हो जाता है जब भ्रष्टाचारियों और रिश्वतखोरों पर बहादुरी और ईमानदारी का ठप्पा सरकार द्वारा लगा दिया जाता है और जो ईमानदार हैं उनपर किसी की नजर तक नहीं पड़ती।
भारत सरकार की रीढ़ की ही समझा जाने वाला उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। और इनको प्रोत्साहित करने के लिहाज से और इनकी बहादुरी के लिए इन्हें हर साल 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के अवसर पर राष्ट्रपति के प्रशस्तिपत्र से नवाजा जाता है।
सन 1962 से प्रारम्भ अब तक देश के तकरीबन एक हजार से ज्यादा केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क अधिकारियों को राष्ट्रपति प्रशस्तिपत्र देकर अलंकृत किया जा चुका है। राष्ट्रपति द्वारा कस्टम और उत्पाद शुल्क अधिकारियों को दिए जाने वाले इस सम्मान का मापदंड यह है प्राणो को संकट में डालकर असाधारण रूप से सराहनीय सेवा निष्पादन करने वाले अधिकारियों को यह सम्मान दिया जाता है। जिसमे प्रतिबंधित तथा नशीलें पदार्थो की तस्करी, कर चोरी एवं व्यापार आधारित धन शोधन का पता लगाना, बुकिंग द्वारा विदेशी मुद्रा उल्लंघन के मामले दोषियों की गिरफ्तारी तथा तस्करी का माल जब्त करना तथा तस्करी निरोधक उपकरणों का उयन एवं विभाग में प्रवर्तन प्रक्रिया को सुचारु बनाना आदि शामिल हैं। लेकिन आप कितने ऐसे अधिकारियों से परिचित हैं जिन्होंने यह करतब किया हो और इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति सम्मान दिया गया हो इक्के-दुक्के ही मिलेंगे। अगर आप ऐसे अधिकारियों ढूँढना शुरू करेंगे जिन्हे राष्ट्रपति सम्मान मिला है तो बहुत मिल जायेंगे लेकिन जब आप इनके सेवा रिकॉर्ड पर नजर डालेंगे तो ढूंढते रह जाएंगे की उस फलां अधिकारी ने कब असाधारण रूप से अपनी जान को संकट में डालकर सोने की तस्करी रोकी, तस्करों का पीछा कर बड़ी मात्राा में हेरोइन या अन्य ड्रग्स बरामद की, मगर हाँ आपको ऐसे अधिकारी जरूर मिल जायेंगे जिन्होंने कुछ ही साल पहले तो राष्ट्रपति सम्मान पाया था और आज तस्करों को मदद पहुँचा रहे है और रिश्वत ले रहे है। अर्थात राष्ट्रपति सम्मान मिल जाना इनके लिए एक ऐसी सीढी बन जाती है जहां से ये इसकी आड़ में सारे गलत काम सही दिखने लगते हैं।
साल 2014-2015 में 40-40 अधिकारियाें को यह सम्मान दिया गया। अब इन अधिकारियों की सेवा पर सरकार को विशेष नजर रखनी चाहिए कि क्या वाक़ई आगे भी यह अधिकारी इसी ईमानदारी से काम करता है कि नहीं! बल्कि राष्ट्रपति सम्मान पाते वक्त इनकी सेवा रिकॉर्ड की सच्चाई भी सबके सामने रखनी चाहिए। देश में आज कई ऐसे कस्टम अधिकारी हैं राष्ट्रपति सम्मान के ठप्पे की बदौलत ऊँचे पदों पर पहुंचे और जमकर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। हमारा यह सब कहने का मात्राा एक की लक्ष्य है कि राष्ट्रपति जैसे गौरवान्वित सम्मान अपने निजी लाभ के लिए ऐसे मिट्टी के भाव न बेचा जाये और असल में जो लोग इसके हकदार हैं उन्हीं को यह सम्मान दिया जाये ताकि ऐसा प्रोत्साहन पाकर देश में ईमानदार अधिकारियों की फौज खडी हो जाये।

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