आईजीआई एयरपोर्ट के स्ट्रांगरूम से चोरी हुए सोने का राज कब खुलेगा! जब …. सोना ….. हो जायेगा?

The IGI airport's Terminal 3 - T3, an integrated terminal for International and Domestic which can handle 34 million passengers annually ahead of the Commonwealth Games

धर्मवीर आनंद।
नई दिल्ली : सोशल नेटवकिग तथा लोगों की जागरुकता के कारण आज बहुत कम खबरें ही छुपी रहती है। चाहे यह खबरें अखबार में या टीवी चैनल वाले न दिखायें। मगर पब्लिक में आम चर्चा रहती है अगर किसी खबर पर मिडिया ने खास तव्वजो दे दी तो जांच शुरु हो जाती है नहीं तो यह मामले दब जाते है या दबा दिये जाते। इसी तरह इन्हीं दिनों में बार-बार अखबारों ने लिखा कि आईजीआई एयरपोर्ट से गोल्ड चोरी हो गया है दो बार गोल्ड चोरी हुआ रिपोर्ट लिखाई गई एक बार 24 किलो एक बार सवा किलो बहुत बड़ी बात है मिलीभगत के बिना कुछ भी चोरी नहीं हो सकता। पहले मैमोरी कार्ड बदले गये। एयरपोर्ट कार्गो से मोबाइल चोरी हो गये। यह वह किस्से है जिनकी एफआईआर दर्ज करवाई गई।
सूत्राों की मानें तो एयरपोर्ट तथा एयर कार्गो में सालों से यह माफिया गैंग सक्रिय है जो बिना ड्यूटी के माल निकालने का काम करते है। लोडर तथा स्टाफ मिला हुआ है। कस्टम ने पिछले कई सालों में एफआईआर भी दर्ज करवा रखी है, शायद 23 मामलें है। इसी तरह माल चोरी हो गया है। पहले माल बिना ड्यूटी के निकाला गया फिर खानापूर्ति के लिए माल चोरी की एफआईआर लिखाई गई ऐसा बताया जाता है। एयरपोर्ट से चोरी की खबर अखबारों की सुर्खियां बनी जांच शुरु हो गई। अभी बताया गया कि अफसरों की जांच की जा रही है कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे है। क्या होगा सब को मालूम है अब मामला दबा दिया जायेगा।
अभी पिछले कई साल पहले चीफ कमिश्नर प्रिवेंटीव सुनील ऊके के टाईम में 200 किलो सोना सरकारी खजाने में जमा करवाया गया। यह वह सोना है जो प्रिवेंटीव ने एयरपोर्ट तथा अन्य एयर कार्गो से पकड़ा था। अफसरी सूत्राों के अनुसार सोना 1975 से लेकर 2014-15 तक का वह सोना था जो लोग सोना छोड़ चुके थे और अलमारियों में पड़ा था। कमेटी बनाई गई सभी पकड़े गये सोने के पैकटों को खोला गया और सारा सोना इक्ट्ठा करके सरकारी खजाने में जमा करवाया गया।
सूत्रों की माने तो इससे पहले भी सोना गायब करने की बातें कस्टम के गलियारों में चर्चा में रही है। कुछ अफसर अपनी चर्चाओं में उन अफसरों का नाम भी लेते है जिनके पास डिस्पोजल का चार्ज रहा है। उन्होंने अपने समय में करोड़ों का सोना गायब किया। आज वह रिटायर्ड हो कर मजे लूट रहे है। अब इन बातों के कोई पुख्ता सबूत तो है नहीं। मगर जो लोग कहते है उनकी बातों पर विश्वास किया जाये तो आज कस्टम में कोई ऐसा रिकार्ड नहीं है जो बताये कि कितना सोना पकड़ा गया कितना जमा करवाया गया और कितना अभी पड़ा है। अगर सिर्फ इन तीन बातों की जांच पिछले 20-25 सालों की जाये तो सरकार को तगड़ा झटका लग सकता है कि सोने को कितने ध्यान से रखा जाता है। जितना सोना रिकार्ड में दिखाया गया है क्या उतना सोना स्ट्रांग रुम में मौजूद है? इसकी जांच होनी चाहिए।
सूत्रों बताते है कि जो सोने के पैकेट पकड़े गये और बाद में खोले गये उन पर सिर्फ यही लिखा होता था वन पैकेट गोल्ड मात्राा का कोई जिकर नहीं होता था। यह सब उन भ्रष्ट अफसरों की नॉलेज में था जो लगातार एयरपोर्ट की पोस्टिंग करते रहते थे। मिलीभगत से सोना निकलने का धंधा आज भी जोरों पर है। मगर इतनी सफाई से यह काम हो रहा है कि कुछ भी बाहर नहीं आता। बाड़ ही खेत को खा रही है। एफआईआर दर्ज कराओ जांच जारी है, जांच जारी है, सुनते रहो। यह माफिया अफसर सब मेंनेज करते रहेंगे। इधर से चोरी करेंगे उधर बड़े अफसरों की चापलूसी करेंगे। जिसको इंग्लिश में कहते है प्रोटोकोल करना। अग्रेजी के इस शब्द का कितना जम कर यह इस्तेमाल करते है सरकारी अफसर। 10 साल बाद हम फिर लिखेंगे कि सोना गायब हो रहा है। यह स्टोरी मुझे फिर दोहरानी पड़ेगी। मगर सरकार जांच हो रही है यही कहती रहेगी। अभी एक सरकार का फैसला आया है कि अक्टूबर 2011 से पहले के केसों को खत्म कर दिया जाये जिन केसों की बिल-ऑफ-एंट्री अक्टूबर 2011 से पहले की है और केस चल रहे है। उनको शो-कास मिले हुये है। सरकारी आकड़ों के अनुसार 37000 करोड़ के लगभग इन केसों में सरकारी वसूली थी जो इन अफसरों के कारण आज सरकार को डूबाने पड़े। आज भी यही हो रहा है कस्टम घोटाला करो पकड़े जायें 60 दिन जेल में रहो बाहर आ कर काम फिर शुरु करो केस सालों साल चलता रहेगा। भ्रष्ट अफसरों को पैसा देकर केस दबवाते रहो और मौज करते रहो डिपार्टमेंट में फिर इन फाईलों का ढेर लगा जायेगा फाईल खो जायेगी फिर सरकार कहेगी सब केस बंद यही है सरकारी सिस्टम। मोदी जी ने अफसरों को बताया कि 92 प्रतिशत टैक्स लोग अपने आप जमा करवा देते है सिर्फ 8 प्रतिशत टैक्स ही इतनी बड़ी अफसरों की फौज होने से होता है। आज समय आकड़ों का है जो झूठ नहीं बोलते इन भ्रष्ट अफसरों को समझ आना चाहिए कि आप देश के लिए क्या कर रहे है।
समाचार पत्रा लिखते है कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (आईजीआई) पर कस्टम विभाग के वेयर हाउस स्थित स्ट्रांग रुम में रखे करोड़ों का सोना चोरी किए जाने के मामले में इस बार चोरी का राज खुलने की उम्मीद है। दरअसल गत वर्ष स्ट्रांग रुम से करीब 24 किलो सोना चोरी होने की घटना सामने आने के बाद पुलिस ने सख्ती करनी शुरु की थी, लेकिन वहां सैंकड़ों किलो सोना रखे होने के बावजूद सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था। जिसके कारण पुलिस को प्रत्यक्ष रुप से कोई सुबूत हाथ नहीं लग सका था। पुलिस अधिकारियों ने इसपर आपत्ति जताते हुए कस्टम विभाग से वेयर हाउस के उस एरिया में जहां सोना रखा है वहां कैमरा लगाने को कहा था। इसके बाद उस स्थान पर चार सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। बावजूद इसके दोबारा से वहां करीब सवा किलो सोना फिर चोरी होने की घटना सामने आई।
आईजीआई थाना पुलिस ने सोना चोरी होने के मामले में मुकदमा दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरु कर दी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से चोरी का राज खुल सकेगा। पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरु करेगी। पुलिस के रडार पर वहां कार्यरत कस्टम के बड़े अधिकारी व कर्मी है।
सूत्रों के मुताबिक आईजीआई एयरपोर्ट के स्ट्रांग रुम में करीब 900 किलो सोना रखा हुआ है। यह तमाम सोना गत 30 से 40 वर्ष में तस्करों से जब्त केस प्रॉपर्टी है। वैसे तो टर्मिनल थ्री की सुरक्षा में सीआइएसएफ की तैनाती है। बावजूद इसके वेयर हाउस के स्ट्रांग रुम की सुरक्षा के लिए विभागीय स्तर पर बहुस्तरीय व्यवस्था की गई है। टर्मिनल के एक बड़े कमरे में स्थित स्ट्रांग रुम के मुख्य दरवाजे की दो चाबियां है। इन चाबियों की जिम्मेवारी दो सुप्रिडेंटों स्तर अधिकारियों के पास है। यही नहीं गत वर्ष 24 किलो सोना चोरी होने की घटना प्रकाश में आने के बाद कस्टम ने चोरी रोकने के लिए वहां की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया था। बावजूद इसके दोबारा सोना चोरी होने से अधिकारियों में हड़कंप मचा है। ज्ञात हो कि वर्ष 2015 में आईजीआई एयरपोर्ट स्थित कस्टम के वेयर हाउस से 24 किलो सोना चोरी होने से सनसनी मच गई थी। चोरी गए सोने की कीमत 7 करोड़ रुपये आंकी गई थी। चोरों ने पाकेट में रखे सोने के बिस्कुट को किसी अन्य धातु से बदल दिया था। वहीं ताजा मामले में फिर सवा किलों से ज्यादा चोरी हो गया। यहीं नहीं चोरी किए गए सोने की जगह सोने जैसी दिखने वाली धातु रख दी गई।

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