GST मिसमैच और नोटिस की टेंशन हुई कम

ईटी ब्यूरो, नई दिल्ली
जुलाई 2017 से सितंबर 2018 का GSTR-1 भरने की डेट 31 अक्टूबर तक बढ़ाने और सभी महीनों की लेट फीस एकमुश्त माफ करने से कारोबारियों के सालाना रिटर्न में मिसमैच और सरकारी नोटिस की आशंका काफी कम हो गई है। ट्रांजिशनल स्टॉक पर इनपुट क्रेडिट के लिए TRAN-1 भरने की समयसीमा भी अब 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है, हालांकि इसका फायदा सिर्फ उन्हीं डीलर्स को मिलेगा, जिनका रिटर्न तकनीकी कारणों से रुक गया था और जिन्हें जीएसटी काउंसिल अप्रूव करेगा।

वित्त वर्ष 2017-18 का सालाना रिटर्न 31 दिसंबर 2018 तक भरा जाना है, जबकि उस अवधि के इनवॉइसेज पर इनपुट क्रेडिट सितंबर महीने के रिटर्न की आखिरी तारीख तक लिया जा सकता है। अभी तक समरी रिटर्न GSTR-3B के मुकाबले GSTR-1 की तादाद 50% कम होने से सालाना रिटर्न में बड़े पैमाने पर मिसमैच के आसार बन रहे थे। इससे इनपुट क्रेडिट रुकने के साथ ही बड़े पैमाने पर नोटिस मिलना तय था। अब सरकार ने एकसाथ कई रियायतें देकर कारोबारियों को बड़ी राहत दी है।

जीएसटी कंसल्टेंट राकेश गुप्ता ने बताया कि अगर सप्लायर GSTR-1 नहीं भरता है तो GSTR-3B से आने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट और और ऑटोजेनरेटेड GSTR-2A से आने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट में बड़ा अंतर नजर आता। दूसरी पार्टी का GSTR-1 पहली पार्टी का GSTR-2A बनकर उभरता है। अब जुलाई से अब तक की लेट फीस माफ होने से माना जा सकता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग लंबित GSTR-1 भरने को आगे आएंगे। जितने ज्यादा GSTR-1 भरे जाएंगे, अंतर उतना ही कम होता जाएगा। इससे आगे चलकर बड़े पैमाने पर नोटिस जारी होने की आशंका काफी हद तक घटी है।

सरकार ने उन डीलर्स के लिए GSTR-3B भरने की डेट तीन महीने तक बढ़ा दी है, जिनका जीएसटी माइग्रेशन रुक गया था। जो डीलर जीएसटी लागू होने के पहले के स्टॉक पर इनपुट क्रेडिट के लिए 31 दिसंबर 2017 तक TRAN-1 फाइल नहीं कर पाए थे, उन्हें 31 मार्च 2019 तक की रियायत दिए जाने से भी कारोबारियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि पहले इसके दायरे में वे सभी डीलर थे, जिनका रिटर्न जीएसटी सिस्टम में खराबी के चलते रुक गया था, लेकिन अब रियायत उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिनके नाम पर जीएसटी काउंसिल मुहर लगाएगी।

सालाना रिटर्न का फॉर्मैट जारी होने से ट्रेड और इंडस्ट्री ने राहत की सांस ली है, लेकिन अब भी इसकी ऑनलाइन लॉन्चिंग का इंतजार किया जा रहा है।

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