नयी दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदमों के कारण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग की हालत खराब हो गयी है और बड़ी संख्या में इकाइयां रूग्ण हो गयी हैं। वहीं सत्ता पक्ष ने दावा किया कि 70 वर्षों से इस क्षेत्र में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया और मौजूदा सरकार ने स्थिति में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं जिसका असर दिखने लगा है। सदस्यों ने सुझाव दिया कि इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार और बैंकों को सहायता देनी चाहिए क्योंकि न सिर्फ जीडीपी में बल्कि रोजगार मुहैया कराने के लिहाज से भी यह क्षेत्र काफी अहम है। सदस्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के कामकाज पर उच्च सदन में हुयी चर्चा में भाग ले रहे थे। द्रमुक के टी के एस इलानगोवन ने चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त कोष की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगों के लिए आसानी से कर्ज मिल जाता है, जहां पैसे डूब भी जाते हैं। लेकिन इस क्षेत्र को बैंकों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता। उन्होंने सरकार से इस क्षेत्र के लिए अनुकूल नीति बनाने की मांग करते हुए कहा कि यह क्षेत्र बड़ी संख्या में रोजगार और स्व-रोजगार के मौके मुहैया कराता है।

भाजपा के अरूण सिंह ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों और योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य जीडीपी में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का है। सिंह ने किए गए प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में वित्त की बाधा को दूर करने के लिए कर्ज प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक पोर्टल की भी शुरूआत की गयी है ताकि एक घंटे से भी कम समय में कर्ज मिल सके। उन्होंने कहा कि कर्ज पर लगने वाले ब्याज की उच्च दर को देखते हुए सरकार ने ब्याज पर सब्सिडी देने का भी फैसला किया है। इसके साथ ही कागजी कार्रवाई से भी मुक्ति का प्रयास किया गया है। कांग्रेस सदस्य अमी याज्ञनिक ने कहा कि देश के विकास और अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र की अहम भूमिका है। उन्होंने सूक्ष्म क्षेत्र की ओर विशेष घ्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। कांग्रेस सदस्य ने कहा कि नोटबंदी के कारण पहले ही यह क्षेत्र काफी परेशान था और बाद में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की जटिलता ने स्थिति और खराब कर दी। उन्होंने क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए सामाजिक कल्याण योजना की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने दावा किया कि जमीनी स्थिति यही है कि ‘मेक इन इंडिया’ और सरकार की अन्य महत्वाकांक्षी योजनाएं नाकाम हो गयी हैं।

अन्नाद्रमुक के विजयकुमार ने कई आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाए जाने की मांग की ताकि इस क्षेत्र को समर्थन मिल सके। उन्होंने तमिलनाडु के लिए विशेष पैकेज की मांग की ताकि वहां सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को राहत प्रदान किया जा सके। सपा के रवि प्रकाश वर्मा ने इस क्षेत्र को रीढ़ की हड्डी बताते हुए कहा कि देश भर में 19 लाख से अधिक इकाइयां रूग्ण हैं और यह क्षेत्र सरकार को आशा भरी नजरें से देख रहा है। वर्मा ने कहा कि क्षेत्र के लिए कर्ज एक बडी समस्या है और उस दिशा में काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और सरकार के लिए यह अवसर है। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच तालमेल नहीं है। उन्होंने मुद्रा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि बैंकों में घोटाले हुए हैं और दस्तावेजों का दुरूपयोग कर दूसरों के नाम पर कर्ज तथा सब्सिडी ले लिए गए। चर्चा में बीजद के सस्मित पात्रा, माकपा के इलामारम करीम, शिवसेना के अनिल देसाई, राजद के मनोज झा, भाकपा के बिनय विश्वम, राकांपा के प्रफुल्ल पटेल, भाजपा के शिवप्रताप शुक्ला, कांग्रेस के रिपुन बोरा, आप के सुशील गुप्ता सहित अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया। चर्चा अधूरी रही।

 

सौजन्य सेः प्रभा साक्षी

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