चाहे लाख तुफ़ा आये चाहे जान भी अब जाये मुश्किल है जीना ब्लैकमनी के बिना

नोट बंदी की मार पड़ी देश में सबसे ज्यादा चोट लगी तो दो नम्बर का काम करने वालों पर। मुम्बई के बार दिल्ली के होटल खाली खाली लगने लगे। 50 दिन तक इन दो नम्बरी लोगों ने किसी तरह मातम में निकाले भगवान ही जानता है। स्मलिंग बंद ही हो गई थी। मगर आज फिर रौनक लौट आई है दो पेज तो एयरपोर्ट पर सोने की स्मलिंग की खबरो के लगाने पड रहे है। जिनकी हमे प्रेस रिलिज आती है इसके अलावा जो वैसे खबरे आ रही है वो है कि चाईना खुलते ही भारत के लोग भूखे शेर की तरह टूट पडेंगे इन बजारों पर हवाला फिर शुरू हो गया है। एयरपोर्ट पर केरियर धडल्ले से उतर रहे है खास बात यह है कि केरियर का कार्य एयरपोर्ट पर दोगुना हो गया है। नकदी का आना जाना जोरो-शोरो से शुरू है दिवाली के स्टाक की तैयारी हो रही है। फर्जी सीएचए ढूंढे जा रहे है जो अफसरों की आंखों में धूल झोंक कर माल निकाल दे मुम्बई, कोलकता, चैन्नई के पोर्ट के अफसरों पर इन स्मगलरों की पूरी निगाह है और भ्रष्ट अफसरों की भी इन स्मगलरों की पूरी आंखे है। सिगरेट, पटाखा स्मगलर पूरी तरह सक्रिय है। फर्नीचर वाले फिर आ गए है सिंगापुर में व्यापार करने होटल में बैठकर पार्टियां बुलाई जा रही है। एक तरफ डीआरआई पैसे जमा करवा रही है। वही अपने पैसे की पूर्ति के लिए नए-नए रास्ते खोजे जा रहे है। एक बार तो डीआरआई ने फर्नीचर इम्पोर्ट में कुछ ऐसे लोग सामने आए है। जो लंबे समय के ईमानदारी से टैक्सी कंपनीयों सें माल मंगा कर कहते थे की हम तो कोई चोरी नहीं करते है। अब वह भी स्मगलरों की लाईन में आ गए है। मगर डीआरआई ने बहुत देर कर देती है यह डीआरआई की आदत है जब तक आदमी करोड़पति न हो जाये। डीआरआई इन को हाथ नहीं लगाती। बहुत केसों में ऐसा देखा है और आगे भी हमें उम्मीद है की जो आज के लखपति है जब तक वह करोड़पति नहीं हो जायेंगे स्मगलिंग के रास्ते डीआरआई के लिए यह अभी छोटी पार्र्टी है।

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