सोना स्मगलरों को पकड़ने की ड्यूटी क्यों भा रही हे जांच ऐजेंसियों को?

Image result for सोना स्मगलरोंनई दिल्ली। आज पूरे देश में सोना स्मगलिंग का धंधा जोरो पर है हर रोज देश के विभिन्न एयर पोर्टो पर सोना उतर रहा है। प्रोफेशनल पेसेंजरो द्वारा जिसमें औरतें भी शामिल है। एयरपोर्ट बदल-बदल कर सोना उतारा जाता है। हर रोज कस्टम तथा डीआरआई सोना स्मगलरों को पकड़ रही है। क्या किसी ने कभी यह सोचा है कि यह सोना लाने वाले लोग कौन है खुद का सोना लाते है या किसी और का जिसके पास काम करते है। अखबारों में भी बस इतना ही लिखा जाता है कि इतने ग्राम का सोना पकड़ा गया , इतने करोड़ का सोना पकड़ा गया जांच जारी है। किस से सोना लेते थे किसे देते थे सब गोल। यह सोना आता है तो खपत कहां होती है? दिल्ली चांदनी चौक में कुचा महाजनी इसका सबसे बड़ा बाजार बताया जाता है। इसके अलावा करोल बाग में भी सोना खरीदने वाले बैठे है। कई बार डीआरआई तथा कस्टम ने इन बाजारों में छापेमारी की विदेशी मोहर लगी सोने की सिल्लियां गलाते हुए पकड़ा भी गया। एक करोड़ का माल है तो वहीं गिरफ्तार वही जमानत हो जाती है। ज्यादा है तो कोर्ट में पेश किया जाता है कुछ दिन अंदर फिर बाहर चलता रहता है। लंबा केस तथ्यों के आधार पर सोना छूट भी जाता है और नहीं भी छूटता। कई केस ऐसे है जिसमे सुप्रिम कोर्ट में सोना छोडने के आर्डर का रखे है। अब बात करते है जांच ऐजेंसियों की कितने प्रतिशत केसो मे डीआरआई असली स्मगलरों तक पंहुचती है। कौन नजर रख रहा है। सोना पकड़ने वाली ऐजेंसियों पर सब इन अफसरों के घेरे मे ही चलती है यह जांच। आज डीआरआई भी रिश्वतखोरी से अछूत नहीं है ज्यादातर केसों की जांच अगर सीबीआई जांच करे तो सरकार सोचने पर मजबूर हो सकती है अभी कुछ महीने पहले एफ.पी.ओ में स्मगलिंग के दो केस बनाये गए। एक केस में सिगरेट तथा दूसरे केस में गोल्ड पकड़ा गया। डीआरआई डीजेडयू ने खूब वाह वाही लूटी। सूत्रों की माने तो इसमें कुछ भ्रष्ट अफसरों ने रिश्वत का खेल खेला स्मगलरों को बचाया गया बेकसूर लोगों को किंग पिन बनाया गया। सूत्रों की माने तो इन सारे मामलों में मुबई का एक आदमी किंग पिन है उस शातिर आदमी के पास 500 से ज्यादा पेसेंजर बताए जाते है जिसमे बच्चों वाली औरतें भी है। अभी मुबई में 20 किलो सोना जो कंटेनर में पकड़ा गया। वह इसी का बताया जाता है। डीआरआइ के पास पक्की सूचना होने के बावजूद भी वह बार-बार क्यों बच जाता है। आज डीआरआई में इतने हल्के अफसर आ चुके है। एक बात का जवाब चाहिए की जो अफसर किसी ओर मलाईदार पोस्टिंग पर पैसे ले रहा होता है वह डीआरआई में आते ही ईमानदार कैसे बन जाता है। भ्रष्ट अफसरों का सब अड्डा बनता जा रहा है डीआरआई डिपार्टमेंट कई भ्रष्ट अफसर डी.जी डीआरआई बनने की प्लानिंग कर रहे है। लिखना तो बहुत कुछ चाहते है मगर हम नहीं चाहते की डीआरआई की कुछ गंदी मछलियों के कारण सभी बदनाम हो।
यह नुरू शेख कौन क्या वास्ता है एफ.पी.ओ से पकड़े गए सोने से इसका?

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