सीबीईसी कसेगा छोटे सर्विस टैक्सपेयर्स पर शिकंजा

मुंबई : छोटे सर्विस टैक्सपेयर्स को अब लंबी टैक्स प्रक्रिया से गुजरना होगा। सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज ऐंड कस्टम्स (सीबीईसी) ने हाल ही में छोटे टैक्सपेयर्स के सर्विस टैक्स रिटर्न्स की जांच के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है। इन दिशानिर्देश पर 1 अगस्त से पालन किया जाना है।IndiaTvf8a2a9_Untitled-1
अब तक बड़े सर्विस टैक्सपेयर्स ही सर्विस टैक्स ऑडिट के दायरे में आते हैं। छोटे सर्विस प्रवाइडर्स पहले इस ऑडिट के दायरे में नहीं आते थे और इस कारण टैक्स चोरी की संभावनाएं थीं। अब नई पहल के अनुसार इन छोटे सर्विस टैक्सपेयर्स को भी टैक्स ऑडिट के दायरे में लाने का मकसद इस प्रकार की टैक्स चोरी को रोकना है।
जांच उन सर्विस प्रवाइडर्स की की जाएगी जिनका 2014-15 वित्त वर्ष के दौरान कुल भुगतान टैक्स की राशि 50 लाख रुपये से कम होगी।
प्राथमिक ऑनलाइन जांच में मोटे तौर पर कुछ परीक्षण किए जाएंगे जिनमें सर्विस टैक्स का समय पर भुगतान या टैक्स गणना की शुद्धता की जांच आदि हाथ से ही की जाएघी। इसमें दी गई सर्विस पर टैक्स लगेगा या नहीं इसकी जांच, लागू टैक्स की प्रभावी दरों की जांच शामिल होगी और यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सर्विस टैक्स पेयर को केंद्रीय वैट क्रेडिट का लाभ मिले।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ‘सर्विस टैक्सपेयर्स को वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान भुगतान किए गए टैक्स के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। वे श्रेणियां होंगी, 10 लाख रुपये तक, 10 लाख से 25 लाख के बीच में और 25 लाख से 50 लाख के बीच में। तीनों बैंड्स से बराबर संख्या में सर्विस टैक्सपेयर्स को चुना जाएगा और उनकी विस्तृत निगरानी होगी। अगर किसी सर्विस टैक्सपेयर का पिछले तीन सालों में ऑडिट हो गया होगा तो उनका ऑडिट नहीं होगा।’
इस जांच के दायरे में कई तरह की सर्विस प्रदान करने वाले आएंगे। चार्टेड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रटरीज, कंसल्टेंट्स, चोटे रेस्ट्रॉन्ट और होटल मालिक, छोटे बिजनस जैसे कूरियर एजेंसीज, कमिशन एजेंट्स और शेयर ब्रोकर्स इसके दायरे में आएंगे।

स्रोत : ईटी

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