सर्विस टैक्स, एक्साइज और इनकम टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए नयी रणनीति बनी

नई दिल्ली : जिनकी रेडीमेड दुकानें हैं या बड़ी किराने या दवाइयों की शॉप हैं। जो मैन्युफैक्चरिंग यूनिटों के मालिक हैं और जो सर्विसेज मुहैया करा रहे हैं। इनकी आमदनी अच्छी-खासी है मगर ये इसे छिपा रहे हैं आैर टैक्स से बच रहे हैं तो अब इनकी खैर नहीं। ऐसे लोगों को अब इनकम टैक्स के दायरे में लाया जाएगा आैर इनसे इनकम टैक्स, पेनाल्टी के साथ वसूला जाएगा। सरकार ने टैक्स चोरी रोकने और टैक्स के दायरे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाने के लिए रणनीति तैयार की है। एेसे लोगों को सर्च किया जाएगा आैर उनसे पेनाल्टी के साथ टैक्स वसूला जाएगा।service tax
क्या है रणनीति

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस रणनीति के तहत इनकम टैक्स, सविर्स टैक्स और एक्साइज ड्यूटी जैसे अलग-अलग टैक्स चुकाने वाले लोगों के आंकड़ों को आपस में मिलाकर उन लोगों की पहचान की जाएगी जो टैक्स की चोरी करते हैं। मिसाल के तौर पर, जो रेडिमेड दुकान चला रहा है, उसको सेल टैक्स तो देना ही होगा। उसके सेल टैक्स की जांच होगी। उसके आधार पर रेवेन्यू डिपार्टमेंट के लोग इस बात की जांच करेंगे कि क्या वह इनकम टैक्स देता है। अगर देता है तो कितना देता है। अगर नहीं देता तो उसकी वास्तविक इनकम पता करने के लिए सर्च ऑपरेशन भी किया जाएगा।

इसके लिए इनकम टैक्स, सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी चुकाने वालों के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। इसके लिए राज्यों के वैट और सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। सभी आंकड़ों का मिलान कर टैक्स से बचने वालों की पहचान की जाएगी। रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने सभी टैक्स डिपार्टमेंट को चिट्ठी लिखी है। वित्त मंत्रालय को उम्मीद है कि इससे टैक्स के दायरे में ज्यादा लोग आ सकेंगे।

कितना है टारगेट

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के उच्चाधिकारियों के अनुसार, ‘सरकार का इरादा टैक्स कलेक्शन बढ़ाने का है। इसके लिए जरूरी है कि इनकम टैक्स देने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो। हमारा लक्ष्य है कि दो साल में इनकम टैक्स देने वालों की संख्या में कम से कम 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी करना।’ पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि इनकम टैक्स देने वालों मेंं करीब 50 से 55 फीसदी वेतनभोगी कर्मचारी हैं। इसका मतलब है कि जो लोग अन्य काम करते हैं, आैर जिनकी आमदमी टैक्स के दायरे में आती है, उनको सरकार को इसके दायरे में लाना होगा। अगर इनकम टैक्स देने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होगी तो टैक्स कलेक्शन भी बढ़ेगा।

क्या है मजबूरी

मौजूदा समय में 1.30 अरब लोगों की आबादी में मात्र 3.95 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स चुकाते हैं। ऐसे में अहम सवाल उठता है कि क्या देश में मात्र इतने लोगों की आमदनी ही इनकम टैक्स के दायरे में आती है। वित्त मंत्रालय के प्रमुख आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम का कहना है कि इनकम टैक्स देने वालों की संख्या काफी कम है। हमें कोई ऐसा सिस्टम तैयार करना होगा कि लोगों की वास्तविक आमदनी सामने आए आैर लोग इनकम टैक्स देने मेें किसी प्रकार का संकोच न करें। अपनी आमदनी छिपाने वाले कारोबारियों के सेल्स टैक्स, एक्साइज टैक्स के आंकड़ों का मिलान कर
स्रोत : ईटी

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