श्रीलाल महल कंपनी के मालिक को गिरफ्तार किया

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नोएडा। श्रीलाल महल ज्वेलरी लिमिटेड कंपनी के मालिक पंजाबी बाग दिल्ली के रहने वाले देवाशीष गर्ग को नोटबंदी के दौरान 140 करोड़ रुपये के 430 किलो सोना को भारतीय बाजार में खपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 23 दिसंबर 2016 को डाक्रेक्टोरेट आॅफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने नोएडा विशेष आर्थिक जोन में चल रही इस कंपनी के ठीकानों पर छापेमारी कर इस फजीर्वाड़े को उजागर किया था। उसी दौरान देवाशीष के पिता प्रेमचंद गर्ग को गिरफ्तार किया गया था। डीआरआई ने मामले की जानकारी सेंट्रल इकोनॉमिक इंटेलीजेंस ब्यूरो को भी दी थी। ब्यूरो ने देवाशीष का कंजरवेशन आॅफ फॉरेन एक्सचेंज एंड स्मगलिंग एक्ट 1974 का दोषी पाया। जिसके बाद वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने उत्तर प्रदेश डीजीपी को देवाशीष गर्ग को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। डीजीपी के निर्देश पर नोएडा पुलिस ने देवाशीष को सेक्टर 63 से गिरफ्तार कर आर्थिक अपराध कारागार मेरठ भेज दिया।
देवाशीष को जैसे ही नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया, लग्जरी कारों में उनके जानने वाले कोतवाली फेज तीन पहुंच गए। साथ ही देवाशीष ने नोएडा पुलिस से तबीयत बिगड़ने की शिकायत की। पुलिस ने डॉक्टर से जांच कराई। जिसमें देवाशीष की तबीयत ठीक थी। सोने में कालाधन खपाने के सबसे बड़े फजीर्वाड़े का हुआ था पदार्फाश डीआइआई अधिकारी के अनुसार नोएडा विशेष आर्थिक क्षेत्र में श्री लाल महल लिमिटेड कंपनी है। यह कंपनी विदेश से शून्य सीमा शुल्क पर सोना मंगाकर उसके गहने तैयार करती है। जिसे सिर्फ निर्यात किया जा सकता है। 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद कंपनी ने 430 किलो सोना मंगाया। जिसे निर्माण करने की बजाए भारत के घरेलू बाजार में खपा दिया। जिसकी कीमत अनुमान के अनुसार 140 करोड़ रुपये हैं। 23 दिसंबर 2016 को डाक्रेक्टोरेट आॅफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने नोएडा और दिल्ली में कंपनी के कई ठिकानों पर छापेमारी कर 15 किलो सोने के आभूषण, 80 किलो चांदी की छड़े और 2.60 करोड़ रुपये नकद बरामद किया था। बरामद नकदी में 2.48 करोड़ रुपये 1000 और 500 के नोट में थे, जबकि 12 लाख रुपये नए नोट थे। कालाधन को सोने में खपाने का यह सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा था। डीआरआइ की कार्रवाई के बाद देवाशीष का हाइकोर्ट से मिली थी राहत डीआरआइ ने देवाशीष गर्ग के पिता प्रेमचंद गर्ग को गिरफ्तार कर लिया था। वह अब भी जेल में है। देवाशीष ने दिल्ली हाइकोर्ट में गिरफ्तारी से रोक की गुहार लगाई थी। हाइकोर्ट ने डीआरआइ के मामले में गिरफ्तारी पर रोक के आदेश दे दिए थे लेकिन, सेंट्रल इकोनॉमिक इंटेलीजेंस ब्यूरो पर रोक नहीं लगी थी।
एमएमटीसी के माध्यम से भी विदेश से खरीदा गया सोना भारत के धातु और खनिज व्यापार निगम लिमिटेड (एमएमटीसी) के माध्यम से भी कंपनी ने विदेश से बड़े पैमाने पर नोटबंदी के बाद सोने की खरीदारी है। इसके लिए कंपनी ने अपने एक संबंधित फार्म में आरटीजीएस के माध्यम से बड़ी रकम को ट्रांसफर किया। इस रकम का इस्तेमाल विदेश से सोना खरीदने में किया गया।
पुराने नोट बदलने के लिए हुआ था सोने में निवेश डीआरआई को जांच में जानकारी मिली कि जिस फार्म के जरिए एमएसटीसी से सोना खरीदा गया, उसे फार्म के माध्यम से श्री लाल महल ने पुराने नोट के बदले भारतीय बाजार में सोना बेच दिया।
जबकि, दुबई से मंगाए गए सोने को ज्वैलरी बनाकर निर्यात करने के लिए मंगाया गया था। कंपनी ने नकली ज्वैलरी निर्यात कर सोना भारतीय बाजार में बेंच दिया। वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से देवाशी गर्ग को गिरफ्तार करने का आदेश प्राप्त हुआ था। जिसके आधार पर देवाशीष को गिरफ्तार कर लिया गया।

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