शालीमार बिल्डर्स पर डीआरआई व ईडी के छापेमारी

लखनऊ : शालीमार बिल्डर्स एक और सवा करोड़ के फ्लैट को कागजों में कुछ लाख का दिखाते थे और खरीदने वालों को दी जाने वाली रसीद कुछ हजार में होती थी। जिन पर उनके भुगतान की असली रकम को एक कोड के जरिए दर्शाया जाता था। खरीददार को यह कोड वाली रसीद रजिस्ट्री होने तक सुरक्षित रखनी पड़ती थी। आयकर विभाग को शालीमार बिल्डर्स के यहां ऐसी कई रसीदें छापे में मिली हैं। साथ ही ऐसे कई दस्तावेज जिनमें लेन-देन को कोड के जरिए दर्शाया गया है।shalimar
सूत्रों के मुताबिक शालीमार बिल्डर्स में ज्यादातर फ्लैट 80 लाख से लेकर ढाई करोड़ तक के हैं। इतनी बड़ी रकम का भुगतान व्हाइट में करना आसान नहीं है। इसलिए ज्यादातर ग्राहकों को शालीमार 50 लाख के भुगतान पर किसी को पांच लाख तो किसी को 50 हजार की रसीद देता था। अगर आयकर विभाग इन रसीदों की गहराई में गया तो फ्लैट खरीदने वाले भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
आयकर विभाग के साथ छापे में शामिल रहीं ईडी और डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस की टीमों को भी विदेश में काला धन लगाए जाने की कई अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। इनकी वे अपने स्तर पर तस्दीक करा रही हैं। ईडी के सूत्रों के मुताबिक एनआरएचएम घोटाले के आरोपित बाबू सिंह कुशवाहा ने अपने एक करीबी के जरिए घोटाले की रकम शहर की कीमती प्रॉपर्टी में लगवाई। इसके बाद इनमें से कुछ को थोड़े समय बाद ही शालीमार बिल्डर्स ने खरीद लिया। इनमें से चारबाग की एक कीमती प्रॉपर्टी शामिल है। यह भी जानकारी आई है कि नए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर भी शालीमार बिल्डर्स ने कई सौ एकड़ जमीन खरीद रखी है।
खाड़ी देशों में धन खपाने का जरिया खालिद को
ईडी और डीआरआई के सूत्रों के मुताबिक शालीमार बिल्डर्स के लोगों ने बड़ी मात्रा में खाड़ी देशों में रकम खपाई है। इनमें से रकम का एक बड़ा हिस्सा काला धन बताया जा रहा है। इसकी पड़ताल की जा रही है। जानकारी के मुताबिक खाड़ी देशों में रकम खपाने में अहम भूमिका खालिद मसूद की रही। अपने कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए खालिद ने दुबई व अन्य शहरों में बड़ी रकम निवेश कराई। ईडी विदेशों में हुए ट्रांजेक्शन और उनके स्रोत के बारे में जानकारी कर रही है।

स्रोत : एनबीटी

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