वैट भी हुआ शामिल ड्यूटी ड्रॉ बैक में रिफंड मिलना होगा आसान

नई दिल्ली : गारमेंट और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर अब जल्द ही राज्य सरकारों के पास लंबित अपना वैट रिफंड केन्द्र सरकार से हासिल कर सकेंगे।
हाल ही में जारी टेक्सटाइल पॉलिसी के तहत सरकार ने एक्साइज, कस्टम और सर्विस टैक्स जैसे केंद्रीय करों की ड्यूटी ड्रॉ बैक स्कीम में राज्य करों को भी शामिल करने का फैसला किया है। फिलहाल ड्रॉ बैक कमेटी राज्यों में लंबित वैट और दूसरे रिफंड का आकलन कर रही है और दो-तीन महीने में कारोबारियों को भुगतान शुरू हो सकता है वैट और ड्यूटी ड्रॉ बैक के साथ जोड़ने का फैसला पॉलिसी जारी होने की तारीख से ही लागू माना जाएगा।
टेक्सटाइल मिनिस्ट्री की ज्वाइंट सेक्रेटरी (एक्सपोर्ट) सुनेना तोमर ने अपेरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईसीपी) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी। उन्होने बताया वैट रिफंड एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ा सिर दर्द रहा है।
सरकार ड्रॉ बैक के तहत पहले ही केंद्रीय करों का रिफंड देती आई है। अब राज्य स्तर पर लगने वाले करों को भी ड्यूटी ड्रॉ बैक के स्कीम में शामिल किया गया है। ड्यूटी ड्रॉ बैक कमेटी राज्य स्तर पर लंबित रिफंड का आकलन कर रही है। बहुत जल्द ही वैट रिफंड भी ड्रॉ बैक किया जा सकेगा।
उन्होने बताया कि चूंकि गारमेंट कारोबारियों को कई राज्यों में डील करना पड़ता है, ऐसे में उनके रिफंड भी कई राज्यों के साथ लंबित हो सकते हैं। अब सभी रिफंड एक ही प्लेटफॉर्म पर हासिल हो सकेगा।
एईसीपी के चेयरमैन अशोक जी रजानी ने बताया कि कमेटी की सिफारिश एक दो महीने मे आ जाएगी, लेकिन एक्सपोर्टर्स को स्कीम का फायदा पॉलिसी लागू होने की तारीख यानी 22 जून 2016 से ही मिलेगा इसके बाद के सभी राज्य स्तरीय करों पर यह लागू होगा। दिल्ली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अनिल वर्मा ने बताया कि वैट को केंद्रीय ड्यूटी ड्रॉ बैक के साथ जोड़ना एक बड़ी राहत है।
दिल्ली वैट विभाग में ही एक्सपोर्टर्स के कई साल के करोड़ों रूपये के रिफंड लंबित होंगे। उन्होंने मांग की कि हेंडीक्राफ्ट और दूसरे एक्सपोर्टर्स को भी स्कीम के दायरे में लाना चाहिए।
गौरतलब है कि दिल्ली सहित ज्यादातर राज्यों में एक्सपोर्टर्स पर शून्य फीसदी वैट है, लेकिन सरकारें पहले यह चार्ज करती हैं और बाद में रिफंड देती है।
सौजन्य से : इकनॉमिक टाईम्स

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