वित्त मंत्री ने डीआरआई के स्थापना दिवस पर अफसरों से कहा की मीडिया से दूरी बनाये रखे

Image result for arun jaitleyरेवेन्यू न्यूज डीआरआई स्थापना दिवस पर सभी को बधाई देता है सलाम करता है उन डीआरआई अफसरों को जो अपनी जान पर खेलकर देश के लिए इन खतरनाक स्मगलरों से बिना हथियार के लड़ता है।
हम तो पहले से लिखते आ रहे है कि डीआरआई ना होती तो आज देश पर इन खतरनाक स्मगलरों का राज होता। देश की अर्थवव्यवस्था को यह तहस-नहस कर देते सही ईमानदार तरीके से काम करने वाले का दिवालियां हो जाता। आज देश मे अमीर-गरीब के बीच की दूरियां बहुत ज्यादा हो गयी है। इन स्मगलरों की वजह से अगर ध्यान से सोचा जाये तो जमीनों के बढ़ते रेट, महंगाई, और बिना जरूरत के फसलों की जमीनों पर फ्लैट बना कर खड़े कर देना इन स्मगलरों के कारण है। बार, क्लब, हुक्का बार, जुआ घर सब इन स्मगलरों की देन है। बहुत कुछ तो सरकार का भी इसमें कसूर है कि अफसर काम करना चाहते है मगर सरकारी दबाव के कारण और कुछ लोगों को ही पॉलिसि का फायदा देने के लिए नए-नए नोटिफिक्ेशन निकाले जाते है ओर कुछ बड़े लोग ही इसका फायदा उठा पाते है।
जैसे अभी मिल्क प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में 20 प्रतिशत फोक्स, मटर, चावल, दाल, गोल्ड ज्वैलरी, सुपारी, काली मिर्च ऐसी बहुत सारी आईटमें है जिनका नोटिफिकेशन सिर्फ चन्द लोगों को ही पता चलता हैऔर करोड़ो अरबों का जब यह फायदा उठा लेते है नोटिफिक्ेशन चेंज कर दिया जाता है। यह भी एक कारण है स्मगलिंग बढ़ने का मगर डीआरआई एक थोड़े से जांबाज अफसरों के सहारे आज दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही है।
यह देश के लिए गौरव की बात है कई बार डीआरआई में भी कुछ गंदी मछलियां पोलिटिक्ल रूट या अफसरी रूट से आ जाती है जिनका हमें भारी दु:ख होता है यह भी एक कारण है स्मगलिंग बढ़ने का क्योंकि यह स्मगलर टाईप इम्पोर्टर-एक्सपोर्टर इन भ्रष्ट अफसरों के कारण करोडों-अरबों रुपए कमा लेते है जिन लोगो की औकात नहीं है एक पहाडगंज के गेस्ट हाउस में रूकने की वह अब दुबई में 50-60 हजार के कमरों में रूकते है ऐसे कितने उदहारण दे सकता हूं लोडर टाईप और इसमें कई क्लीयरिंग ऐजेंट कम स्मगलर भी इसी गिनती में आते है।
जेटली जी ने कहा की काम पर ध्यान दे डीआरआई अफसर मीडिया से दूरी बनाये रखे पहले कौन सा डीआरआई और मीडिया का आपसी संपर्क है। किसी भी केस की एक भी लाईन अफसर नहीं बताता कि किस केस में क्या जांच हो रही है। माल पकड़ने और केस की प्रेस रिलिज देना अखबार को या चैनलों को कोई बुरी बात नहीं है। कोई भी संस्था या एजेंसी कोई केस बनायेगी वह तो चाहेगी की शबाशी मिलती रहे।
न मीडिया शबाशी दे न नेता शबाशी दे यह तो कोई बात नही बनी। क्या आप नेताओं को ही शबाशी की जरूरत है। अफसरों से थोड़ा सा गलत काम हो जाये तो फाईल खोलने का काम दो मिनट में हो जाता है। पहले से ही मीडिया रेप, मर्डर, सिलिंग, पॉल्यूशन, की खबरे छाप-छाप कर लोगों को बोर कर रहा है किसी अच्छी खबर को छापना तथा दिखाना मीडिया का ही काम है। अफसरों को अपना काम करना चाहिए, न्यायपालिका को अपना काम करना चाहिए, नेताओ को अपना का करना चाहिए और मीडिया को भी अपना काम करना चाहिऐ मगर मीडिया अपने कर्तव्य से भटक चुकी है।
पैसे और प्रेशर से और कुछ चापलूस पत्रकारों की वजह से मीडिया अपना कर्तव्य सही ढंग से नहीं निभा रही है। इसीलिए आज नेता तथा अफसर अपनी मर्जी चला रहे है।

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