लॉकडाउन से बढ़ेगी जीएसटी विवादों की सप्लाई!

बड़े पैमाने पर कैंसल होंगे ऑर्डर, नियमों से छूट की मांग

[ प्रमोद राय | नई दिल्ली ]

सरकार ने जीएसटी कंप्लायंस से जुड़ी तमाम डेडलाइंस में तीन महीने की मोहलत तो दे रखी है, लेकिन लॉकडाउन खुलते ही सप्लाई और भुगतान में देरी, ऑर्डर कैंसलेशन, ई-वे बिल, पोस्ट सेल डिस्काउंट और अन्य जीएसटी प्रावधानों से जुड़ी देनदारियां टेंशन दे सकती हैं। अब ट्रेड और इंडस्ट्री ने सरकार को टैक्स के अतिरिक्त बोझ और जटिलताओं की जानकारी देनी शुरू कर दी है और कोरोना संकट के मद्देनजर उनसे निजात की मांग शुरू हो गई है।

सीबीआईसी की जीएसटी पॉलिसी विंग को सुझाव भेजने वाले टैक्स कंसल्टेंट गौरव गुप्ता ने बताया, ‘अचानक लागू हुए लॉकडाउन के चलते बड़े पैमाने पर कॉन्ट्रैक्ट और ऑर्डर्स कैंसल होंगे। इस दौरान सप्लायर और कुछ मामलों में रेसिपिएंट को मिली एडवांस रकम जब्त हो सकती है। ऐसी रकम पर जीएसटी नहीं लगनी चाहिए। इसी तरह अगर कोई इस संकट की अवधि में पहले से घोषित किराए या फीस में छूट देता है तो छूट की रकम सप्लाई नहीं मानी जानी चाहिए।’ उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद भुगतान भी बाधित होंगे। जीएसटी रूल्स के तहत सप्लाई पर 180 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिवर्स करना अनिवार्य है। सरकार को इसमें भी रियायत देनी चाहिए।

ICAI, CAIT, FAIVM, BUVM सहित कई संगठनों ने सरकार से मांग की है कि 1 जनवरी से 30 सितंबर 2020 के बीच हुई सप्लाई पर कॉन्ट्रैक्ट कैंसलेशन के मामले में सप्लायर को जीएसटी रिवर्स करने की छूट मिले। चूंकि लॉकडाउन के बाद उपजे आर्थिक हालात में कीमतों में छूट और मोलभाव का दौर भी शुरू होगा, ऐसे में इस दौरान अगर कोई पोस्ट सेल्स डिस्काउंट ऑफर की गई है तो वहां सेक्शन 34 के तहत क्रेडिट नोट जारी करने की छूट भी मिलनी चाहिए।

होटल संगठनों ने मांग की है कि क्वॉरंटीन किए गए लोगों को रूम देने वाले होटलों को छह महीने के लिए उन रूम्स पर टैक्स छूट मिलनी चाहिए। ऑल इंडिया टैक्स एडवोकेट फोरम के प्रेसिडेंट एम के गांधी ने कहा कि सरकार लॉकडाउन के बीच हर हाल में जरूरी चीजों की सप्लाई बरकरार रखना चाहती है। इन चीजों की तेज मूवमेंट के लिए इन्हें ई-वे बिल से भी मुक्त कर देना चाहिए। इंडस्ट्री कोरोना के इलाज और आइसोलेशन से जुड़ी सामग्री की सप्लाई पर भी जीएसटी से छूट मांग रही है। हालांकि सरकार ने जीएसटी भुगतान में देरी पर ब्याज कैलकुलेशन आउटपुट के बजाय नेट टैक्स पर ही करने की घोषणा पहले ही कर रखी है, लेकिन अब कारोबारी जनवरी से सितंबर के बीच पेनाल्टी माफ करने या दरें न्यूनतम रखने की मांग भी कर रहे हैं

 

सौजन्य से: नवभारत टाईम्स

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