रिमोट कंट्रोल इम्पोर्ट में अंडरवेल्यूशन का धंधा जोरों पर

Image result for remotesनई दिल्ली : आज देश में इम्पोर्ट में अंडरवेल्यूशन का धंधा खूब फल-फूल रहा है। दूसरा चैप्टर बदल कर ड्यूटी दिये बिना माल निकालने के कई मामले सामने आए है। मिस-डिक्लरेशन का काम तो स्मगलर कर ही रहे है। मगर अंडरवेल्यूशन का धंधा उन इम्पोर्टरों को वरदान साबित हो रहा है जो जेल जाने से डरते है। हर साल की करोड़ों की ड्यूटी चोरी भी करो और बचे रहो। कारण अन्डरवेल्यूशन को सरकार सिद्ध करने में सिर खपाई नहीं करना चाहती। कोर्ट में भी ज्यादातर केसों में कस्टम की किर-किरी हुई है। आज मैं बात करना चाहता हूँ रिमोट कंट्रोल की आज हर इलैक्ट्रोनिक तथा
इलेक्ट्रिक

आईटम में रिमोट का इस्तेमाल होता है। अरबों का धंधा है हर साल का। सारा कच्चा माल चाईना से आता है खासतौर पर कम्पोनेन्ट। देश में कई छोटे-बड़े रिमोट कन्ट्रोल बनाने वाले है। 99 प्रतिशत माल चाईना से मंगा कर यहां असेम्बल किया जाता है। सूत्रों के अनुसार रिमोट तथा रिमोट कन्ट्रोल के पार्ट्स इम्पोर्ट करने में ही भारी अन्डर वेल्यूशन हो रही है। सूत्रों के अनुसार 5 रुपए से लेकर 8-10 रुपए तक पर पीस रिमोट कन्ट्रोल इम्पोर्ट दिखाया जाता है जबकि यह चाईना से ही 25-30 रुपए में खरीदा जाता है। और मार्केट में 60 रुपए से लेकर 200 रुपए तक बेचा जाता है।
यह स्मगलर टाईप इम्पोर्टरो के कारण देश को हर साल सूत्रों के अनुसार 200 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू घाटा होता है। करोड़ों की जीएसटी चोरी अलग से होती है। कुछ साल पहले भी रेवेन्यू न्यूज ने इस बारे में बड़े अफसरो की नॉलेज में लिखकर दिया था। तब मुम्बई, नावा शिवा, दिल्ली, चैन्नई तथा कोलकता कमिश्नरेट ने 19 रुपए 80 पैसे में वेल्यू फिक्स की थी मगर इस रेटों को कुछ साल ही ध्यान दिया गया। उसके बाद फिर से यह वही 5-7 रुपए में इम्पोर्ट होने लगा। देश की एक रिमोट बनाने वाली कम्पनी ने अभी वित्त मंत्री तथा बड़े अफसरों को पूरे आकड़ों के साथ अभी पत्र लिखा है की अगर स्मगलिंग बंद नहीं हुई तो मेक इन इंड़िया के बजाय इम्पोर्ट इन इंड़िया पर ज्यादा काम शुरू हो जाएगा।

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