रिटायरमेंट से पहले भ्रष्टों को पकड़ो

Narendr Modi_2--621x414केंद्र सरकार ने अपने सभी विभागों को घूसखोर अधिकारियों पर अंकुश लगाने के दिए निर्देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा आइएएस अफसरों को दी सीख
नई दिल्ली में बृहस्पतिवार को वर्ष 2013 बैच के आइएएस अधिकारियों से मुखातिब मोदी।

नई दिल्ली : सरकार ने भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ उनके रिटायरमेंट के पूर्व कार्रवाई सुनिश्चित करने का फैसला किया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने अपने सभी विभागों से आईएएस अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के लंबित मामलों की मासिक आधार पर समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इसके पीछे मंशा यह है कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई को समय पर उनके रिटायरमेंट से पूर्व अंतिम रूप दिया जा सके।
पाया गया है कि आमतौर पर मंत्रालयों से आइएएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के संबंध में प्रस्ताव तब मिलते हैं, जब उनकी सेवानिवृति की तिथि करीब होती है। मंत्रालय, कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के जरिये प्रस्ताव को आइएएस अधिकारियों के कैडर नियंत्रण प्राधिकार को भेजते हैं। डीओपीटी ने अपने ताजा दिशानिर्देश में कहा है कि मंत्रालय या विभागों की ओर से देरी से प्रस्ताव मिलने के कारण कैडर नियंत्रण प्राधिकार को अक्सर जांच पूरी करने व अधिकारियों की सेवानिवृति से पूर्व अनुशासनात्मक प्राधिकार से मंजूरी लेने में कठिनाई होती है।’ इसमें कहा गया है कि संबंधित मंत्रालयों के मुख्य सतर्कता अधिकारी, आइएएस अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाहियां शुरू करने के लिए उनसे संबंधित मामलों की मासिक समीक्षा करेंगे। साथ ही यह सुनिश्चित करेंगे कि जो लोग एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत होने वाले हैं, उनका ब्योरा तिमाही रिपोर्ट में दर्ज होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समारोह में बताया था कि असंतोषजनक प्रदर्शन और लोक सेवा प्रदान करने में देरी के कारण 45 वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को दंडित किया गया है।
भ्रष्टाचार के ‘वायरल’ से लड़ें आइएएस अफसर
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा आइएएस अधिकारियों को भ्रष्टाचार के ‘वायरल’ से लड़ने के लिए खुद को तैयार करने की सीख दी है। साथ ही कहा है कि वे आम जनता के जीवन में सुधार लाने वाले एजेंट के तौर पर कार्य करें। नई ऊंचाइयों पर पहुंचने के लिए देश को इस ‘सुनहरे अवसर’ की जरूरत है। मोदी यहां 2013 बैच के 169 आइएएस अधिकारियों से रूबरू थे। उन्होंने कहा, ‘अधिकारियों को ‘तनाव और संघर्षो’ का खुद पर असर नहीं पड़ने देना चाहिए, बल्कि अपने प्रयासों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का काम करना चाहिए। वे ईमानदारी और कड़ी मेहनत से ‘बड़े बदलाव’ ला सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि कभी-कभी, हम देखते हैं कि वायरल बुखार आने से कुछ लोग शिथिल पड़ जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि प्रतिरोधक क्षमता और आत्मबल उन्हें वायरल के वायरस से लड़ने की ताकत देता है। हम जहां भी जाएं, देखते हैं कि वहां अकर्मण्यता, निराशा और भ्रष्टाचार का वायरल फैला हुआ है। हालांकि यदि कोई अंदर से मजबूत है तो वायरल से प्रभावित होने के बाद भी सिर्फ एक गोली में ही बीमारी ठीक हो सकती है। एक ऊर्जावान व्यक्ति ‘वायरल-प्रभावित स्थिति’ में बदलाव ला सकता है। यदि एक गोली ऐसा बदलाव ला सकती है, तो फिर हम मनुष्य ऐसा क्यों नहीं कर सकते।
सौजन्य से : दैनिक जागरण

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