रबड़ गुड्स पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ी ,फ़िनिश्ड गुड्स पर 10 फीसदी और रॉ मैटीरियल पर 25 फीसदी

कोच्चि  : केंद्र सरकार के नेचुरल रबड़ पर इंपोर्ट ड्यूटी को 20 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी किए जाने पर मिलीजुली प्रतिक्रिया आ रही है। रबड़ यूजर इंडस्ट्री ने इसका विरोध किया है, जबकि नेचुरल रबड़ प्रोड्यूसर्स इस कदम से खुश हैं।
रबड़ और टायर इंडस्ट्री को डर है कि उन पर इस फैसले से काफी बुरा असर पड़ेगा। फिनिश्ड रबड़ गुड्स को 10 फीसदी पर इंपोर्ट किया जा सकेगा, जबकि रॉ मैटीरियल को 25 फीसदी शुल्क चुका कर ही मंगाया जा सकेगा। रबड़ और टायर इंडस्ट्री ने इस फैसले को अनफ्रेंडली और भविष्य के निवेश को निराश करने वाला बताया है।
ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ATMA) के चेयरमैन रघुपति सिंघानिया ने कहा, ‘नेचुरल रबड़ पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाना इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की स्थिति को और खराब करेगा, इससे लार्ज-स्केल पर इंडिया में टायर्स डंप किए जाने का खतरा बढ़ गया है।’ नॉन-टायर रबड़ गुड्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की 5,500 यूनिट्स हैं। इनसे 20 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इन्हें भी लग रहा है कि इंपोर्ट ड्यूटी में इजाफे से उन पर नेगेटिव इंपैक्ट पड़ेगा।
ऑल इंडिया रबड़ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (AIRIA) के प्रेसिडेंट मोहिंदर गुप्ता के मुताबिक, ‘पहले से ही कई मैन्युफैक्चरर्स कॉम्पिटिशन के चलते अपनी यूनिट्स बंद कर चुके हैं। ऐसा सस्ते इंपोर्टेड रबड़ गुड्स के चलते करना पड़ा है। कई चीन और दूसरे देशों से इंपोर्टे होने वाले रबड़ गुड्स की ट्रेडिंग की वजह से मैन्युफैक्चरिंग से बच रहे हैं।’
इन इंडस्ट्रीज ने इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि ग्रोअर्स को सब्सिडी के जरिए सीधा सपोर्ट दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार के इस कदम से खुश प्रोड्यूसर्स का कहना है कि यह फैसला रबड़ प्लांटेशन बिजनेस के हित में है। यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया (उपासी) के वाइस प्रेसिडेंट एन धर्मराज के मुताबिक, ‘हालांकि, पिछले फिस्कल ईयर में 4.2 लाख टन रबड़ का रिकॉर्ड इंपोर्ट हुआ, जो 3.4 लाख टन के प्रॉडक्शन-कंजम्पशन से कहीं ज्यादा है। ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी से कम से कम मीडियम टर्म में डोमेस्टिक रबड़ प्राइसेज में तेजी आएगी।’ धर्मराज ने बताया कि ड्यूटी में बढ़ोतरी के साथ TSR ग्रेड रबड़ का लैंडेड प्राइस 115 रुपये प्रति किलो होगा, जबकि लोकल रबड़ की कीमत 106 रुपये प्रति किलो है। RSS-4 रबड़ का लैंडेड प्राइस अब 141 रुपये प्रति किलो होगा, जबकि डोमेस्टिक ट्रेडेड प्राइस 119 रुपये है।
स्रोत : ET

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