म्याउ-म्याउ ड्रग के साथ 8 अंतर्राष्ट्रीय ड्रग तस्कर धरे

नई दिल्ली : स्पेशल सेल ने दुबई से संचालित हो रहे इंटरनेशनल ड्रग तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए आठ तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 25 करोड़ रुपये कीमत का 14.2 किलो चर्चित म्याउ-म्याउ ड्रग बरामद हुआ है। गिरोह का सरगना कैलाश इसे दुबई से संचालित करता है, पुलिस उसके अंडरवल्‍​र्ड कनेक्शन के बारे में जानकारी जुटा रही है। गिरोह को ड्रग देने के आरोप में फरार आईजीआइ एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम इंस्पेक्टर की तलाश में छापेमारी की जा रही है।
स्पेशल सेल डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम रेंज स्पेशल सेल की टीम ने पठानवाड़ी पेरूलाइन मुंबई निवासी मोहम्मद फैजान अहमद सुपारीवाला (36), सीआर पार्क एफ-1139 निवासी सुरेंद्र सिंह उर्फ सन्नी (34), कोंडली गांव कृष्णा नगर दिल्ली निवासी रिशी कोली (35), साहिबाबाद मेन श्याम पार्क निवासी गुू यादव (33), वसुंधरा गाजियाबाद गंगा कॉम्प्लेक्स निवासी मनोज सेंगर (46), वसंत कुंज नई दिल्ली निवासी संजय खन्ना (43), सेक्टर-17 रोहिणी दिल्ली निवासी दीपक पराशर उर्फ पंडित (38), गणोश नगर-2 दिल्ली निवासी महेंद्र सिंह राणा (53) को 14.2 किलो ड्रग के साथ गिरफ्तार किया है। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती ड्रग तस्करी को लेकर पिछले तीन महीनें से टीमें इस पर काम कर रही थीं। मुंबई निवासी फैजान सुपारीवाला की सटीक सूचना मिलने के बाद एसीपी अखिलेश्वर यादव, इंस्पेक्टर दिनेश आर्य, इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह, राकेश मलिक की टीम ने घेराबंदी कर उसे दबोचा। आरोपी के पास से म्याउ-म्याउ ड्रग के एक किलो एवं 215 ग्राम एवं 995 ग्राम के पैकेट बरामद किये गए। फैजान से पूछताछ के बाद अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
बड़ी लंबी है शातिरों की चेन रू फैजान ने बताया कि ड्रग सीआर पार्क निवासी सन्नी नाम के व्यक्ति से ली है और आज वह जीके पार्ट-2 के पास से एक अन्य व्यक्ति को ड्रग देने जा रहा है। वह और उसका रिश्तेदार आरिफ कैलाश नाम के व्यक्ति के लिये काम करते हैं। महाराष्ट्र निवासी कैलाश कई साल से ड्रग तस्करी कर रहा है और मुंबई का वांछित अपराधी है। छह महीने पहले ही वह दुबई शिफ्ट हो गया। सन्नी ने बताया कि वह ड्रग एक गुडडू, रिशी और त्यागी से खरीदता था। टीम ने रिशी के कृष्णा नगर स्थित घर पर छापेमारी कर उसे दबोच लिया। उसने बताया कि वह एक दीपक पंडित और त्यागी से ड्रग खरीदता था और ड्रग को सन्नी और त्रिलोक सिंह को एजेंट गुडडू के जरिये बेच देता था। टीम ने इस पर गुडडू यादव को साहिबाबाद स्थित उसके घर से उसे दबोच लिया और उसके पास से 600 ग्राम एवं 350 ग्राम म्याउ- म्याउ ड्रग बरामद किया।
गुडडू यादव एवं रिशी ने बताया कि वे एक मनोज से ड्रग लेते थे। पुलिस ने मनोज सेंगर को चाणक्यपुरी क्षेत्र से दबोचा और उसकी निशानदेही पर टीम ने दीपक परासर उर्फ पंडित और संजय खन्ना को दबोचा। सभी के पास से 850 ग्राम ड्रग बरामद किया गया। संजय ने बताया कि उन्हें ड्रग की सप्लाई एक महेंद्र सिंह राणा करता है। संजय की सूचना पर टीम ने छापेमारी कर 9.9 किलो ड्रग के साथ महेंद्र को दबोच लिया। महेंद्र ने बताया कि उसे 21 किलो ड्रग आईजीआइ एयरपोर्ट पर तैनात एक कस्टम इंस्पेक्टर ने बेचा था। स्पेशल सेल की टीम ने इंस्पेक्टर की तलाश में ऑफिस और घर पर छापेमारी की लेकिन वह तभी से फरार चल रहा है। सेल अधिकारियों के अनुसार ड्रग तस्कर मोहम्मद फैजान ड्रग की सप्लाई लेने के लिए मुंबई से फ्लाइट से आता था और फ्लाइट में पकड़े जाने से डर से वह ट्रेन से लेकर मुंबई जाता था। इतना ही ड्रग की लेन-देन के दौरान तस्कर मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते थे। उन्हें पहले ही पता होता था कि कहां और किससे मिलना है। स्पेशल सेल डीसीपी संजीव यादव का कहना है कि भारत में अफगानिस्तान और पाकिस्तान से बड़े पैमाने पर ड्रग भेजा जा रहा है।
युवाओं की नशों जहर घोलने के लिए खाड़ी एवं यूरोपीय देशों से भेजे जा ड्रग के गिरोह में कस्टम अधिकारी भी शामिल हैं। स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए तस्करों के पास से जो ड्रग बरामद की गई उसे आइजीआइ एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम इंस्पेक्टर पुनीत कुमार ने ही गैरकानूनी तरीके से तस्करों को बेची था। तस्करों की गिरफ्तारी के बाद से इंस्पेक्टर फरार है। स्पेशल सेल के अनुसार इंस्पेक्टर के पकड़ में आने के बाद गिरोह से जुड़े कई अन्य सरकारी कर्मचारियों के नाम सामने आ सकते हैं।
स्पेशल सेल सूत्रों के अनुसार डीआरआई ने 20 फरवरी 2015 को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर 520 किलो ड्रग पकड़ा था। जिसे डीआरआई ने जब्त किया था। स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किये गए ड्रग तस्कर महेंद्र सिंह राणा ने पूछताछ में बताया कि उसे 21 किलो ड्रग आईजीआइ एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम इंस्पेक्टर पुनीत कुमार ने उपलब्ध कराया था। जिसमें से 12 किलो ड्रग उसने संजय खन्ना के जरिये बेच दिया और 9 किलो उसके पास से सेल ने बरामद किया गया है। स्पेशल सेल सूत्रों की माने तो खाड़ी और यूरोपीय देशों से ड्रग की तस्करी कोरियर के जरिये होती है या फिर ब्रीफकेस में रखकर तस्कर ड्रग लेकर भारत पहुंचते हैं। सेल के अनुसार एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों से ड्रग तस्करों की साठगांठ के कारण ड्रग पकड़ा नहीं जाता। वहीं ब्रीफकेस में छुपाकर लाने पर स्कैनर में पकड़ में नहीं आता।
स्पेशल सेल के अनुसार इंस्पेक्टर पुनीत कुमार के पकड़ में आने के बाद कई अहम जानकारियां मिलेंगी। दिल्ली में डेढ़ साल पहले उत्तरी जिला पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय क्षेत्र में म्याउ-म्याउ ड्रग पहली बार पकड़ा था।
सौजन्य से : दैनिक जागरण

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