मुम्बई न्हवाशिवा पोर्ट पर अफसरों की वसूली करने वालों का एक-छत्र माफिया राज

बिना इनकी इजाजत के अफसर तो क्या सीएचए भी काम नहीं करवा सकता

मुम्बई : एक समय था जब न्हवाशिवा कस्टम के तमाम कंटेनर याडों‍र् पर एक छत्र राज कायम करने वाले कस्टम अफसरों के कैश कलैक्टरों की मनमानी चलती थी। वह एक ऐसा दौर था जहां कुछ ऊंचे पकड़ रखने वाले कलैक्टरों के  इशारों पर मुम्बई कस्टम जोन-। एवं जोन-।। में बड़े स्तर के उच्च कस्टम अफसर नाचते थे। यह जो कहते वहीं अफसर करता था इनमें कुछ ऐसे कलैक्टर थे जो एक दशक पूर्व में चीफ कमिश्नर, कमिश्नर एवं अडिशनल कमिश्नर को अपने इशारे पर घूमाते थे।

जब जिसे चाहा उसे उसके मन-पसंद मलाईदार जगह पर बैठाने की दलाली ये कलैक्टर करते थे।  इनमें कई बड़े चेहरे है जो आज उसी दलाली के दम पर करोड़पति बन कर बड़ा ट्रेड्स इम्पोर्टर बनकर बैठे है। उस दौर में न्हवाशिवा के अंदर चार से पांच सीएचए ही काम किया करते थे। प्रति दिन कलैक्टरों का हिसाब लाखों रुपये बनता था इसके इसके अतिरिक्त चोरी और मिस-डिक्लेयरेशन की कमाई अलग थी। ये कलैक्टर वसूली करवाने के लिए लड़कों को कमीशन पर रखते थे और लाखों रुपया इकठ्ठा करते थे। लड़के इनके इशारों पर स्पीड मनी के रूप में वसूली करते थे।  ज्ञात हो एक दशक पूर्व में इन कलैक्टरों की मनमानी के चलते कई इम्पोर्टर सीबीआई में शिकायत करवा कर अफसर एवं कलैक्टरों को रंगे हाथ पैसे लेते हुए पकड़वा चुके है।

उस दौर में सीबीआई की टीमें हर महीने ऐसे भ्रष्ट कस्टम अफसरों को पकड़ा करती थी इतना कुछ होने के बाद भी ये कलैक्टर कुछ दिनों के बाद इस धंधे में लग जाते थे। आज और कल को देखा जाये तो उस दौर के गुजरते-गुजरते आज न्हवाशिवा कस्टम के अंदर 25 से 30 सीएफएस बन गये है और आज इम्पोर्ट डाक्स तथा एक्सपोर्ट डाक्स को मिलाकर उस पिछले एक दशक पूर्व जो 20 से 25 कलैक्टरों की संख्या थी वह आज सैंकड़ों में हो गई है। फर्क इतना है कि उस दौर के कलैक्टर आज बढ़कर धन्ना सेठ बन बैठे है और शिष्य अपने गुरु के पदचिन्हों पर चलते हुए अपना साम्राज्य चला रहे हैं। इनमें फर्क बस इतना है कि इन नये कलैक्टरों का नाम एवं चेहरा केवल बदला है। इनके कैश गुरुओं में कुछ ऐसे चेहरे है जिनका पूरा परिवार भाई-बंधु वर्ग सभी इस मलाईदार व्यवसाय में लगे हुये है।

एक दशक पूर्व जब मुम्बई एवं न्हवाशिवा कस्टम में पहली बार एक सर्कुलर कस्टम बोर्ड से पारित करवाकर यहां लागू करवाया गया। उन नये नियमों एवं कानून को यहां के तत्कालिन मुख्य आयुक्त श्री एन.शशि धरन से हरी झंड़ी मिलते ही मानों सुप्रिडेंटों के साथ-साथ इन कैश कलैक्टरों के महागुरुओं की लॉटरी लग गई। इनके पैर आसमान पर चलते थे। इन नये नियम शतों‍र् के आने पर डाक्स इम्पोर्ट में अप्रेजरों के स्थान पर सुप्रिडेंटों की नियुक्ति होने लगी जो डाक्स के कार्य से बिल्कुल अंजान थे। इनका कार्यकाल एक वर्ष तय किया गया, डाक्स की पोस्टिंग पाने के लिये तमाम सुप्रिडेंट अपनी अपनी सेटिंग करने लगे इसी कड़ी का फायदा उस समय के कुछ चुनिंदा कैश गुरु कलैक्टरों ने उठाना जारी कर दिया। यह नये नियम के तहत डाक्स में सुप्रिडेंटों की नियूक्ति का कानून पारित करवाने के लिए इन तमाम कस्टम सुप्रिडेंटों ने मुंबई कस्टम के तीनो जोनों के चीफ कमिश्नरों से सिफारिशें एवं विनती की। यहाँ तक कि ये सुप्रिडेंट मिलकर बड़ी-बडी पार्टियों दिया करते थे। अपने उच्च विभागीय अफसरों के सभी आदेशों को पूरा करते थे तब जा कर यह संम्भव हो पाया। आज ये सभी सुप्रिडेंट उस समय के तत्कालीन अपने चीफ कमिश्नर को भगवान स्वरुप मानते है फिर धीरे-धीरे इनका डाक्स में आना जाना शुरु हो गया बस इन्हीं सुप्रिडेंटों को अपना अस्त्र बनाकर कुछ कलेक्टरों ने अपना धंधा शुरू कर दिया। उसमें एक चेहरा जो बहुत बड़ा मास्टर माइंड डाक्स न्हवाशिवा एवं कुछ मलाईदार कस्टम ग्रुप का बेताज बादशाह बन गया। फिफ्टी-फिफ्टी स्कीम के तहत इसने सुप्रिडेंटों के दूसरी पोस्टिंग में कस्टम अफसरों को सेटिंग कर डाक्स इम्पोर्ट में उनकी पोस्टिंग दिलवाने का कार्य शुरु कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार इस व्यक्ति ने प्रतिदिन डाक्स में लाखों रूपये की वसूली चालू कर दी। किसी-किसी अफसर को तो यह भी ज्ञात नहीं थी कि किस कंसाइनमेंट में कितना हिसाब बनता है इसी की आड़ में यह कलैक्टर बेखौफ होकर फिफ्टी-फिफ्टी के बजाय पूरा का पूरा माल हजम कर जाता था। अफसर द्वारा विरोध करने पर यह जवाब देता था कि सर यह मत भूलों कि मैंने ऊपर एक मोटी रकम देकर आपकी पोस्टिंग करवाई है। क्या सरकार कभी इस सिस्टम को रोक पाएगी। पूरे देश के पोटो पर प्राईवेट लड़कों को रखने का रिवाज हो चुका है यह लड़के ही अफसरों को बताते है कि किस फाइल के कितने पैसे लेने है। यह लड़के किसी न किसी खास क्लीरिंग एजेंट से जुड़े होते है उसका यह न:2 की फाइलें भी क्लीयर करवाते रहते है। इस तरह से आज पूरे देश के पोटो पर इन स्मगलरों का इन लड़कों की वजह से कहीं काम नहीं रुकता। यह माफिया राज कब तक?

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