मुंबई में तीन हजार करोड़ के डायमंड आयात घोटाले का खुलासा

मुंबई
राजस्‍व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने तीन हजार करोड़ के डायमंड आयात घोटाले का पर्दाफाश किया है। डीआरआई के मुताबिक हीरे के व्‍यापारियों ने कीमत तय करनेवालों की मदद से इस बेशकीमती पत्‍‍‍‍‍थर की कीमत को ज्‍यादा बताकर आयात किया और इसके बदले में काला धन विदेश भेज दिया। बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़ साल में करीब तीन हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है।

डीआरआई के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में एक आयातक ने एक करोड़ के हीरे का मूल्‍य 160 करोड़ रुपये दिखा दिया। आरोपी आयातक इस समय फरार चल रहा है। इस तरह से 159 करोड़ रुपये देश से बाहर भेजे गए। हीरे की कीमत तय करनेवालों की पहचान प्रदीप कुमार झावेरी, नारेश मेहता और परेशा शाह के रूप में हुई है।

इन लोगों ने आयातक को अपनी मौन सहमति दे दी। इस घोटाले में चौथे व्‍यक्ति की पहचान कस्‍टम क्लियरिंग एजेंट विशाल कक्‍कड़ के रूप में हुई है। हीरे की कीमत तय करने वाले लोगों ने कई अन्‍य आयातकों के साथ साठगांठ कर ली और आयात किए गए हीरे का ज्‍यादा कीमत वाला सर्टिफिकेट जारी कर दिया।

बता दें कि हीरे की कीमत तय करने वाले लोगों को कस्‍टम विभाग के पैनल पर पूरी जांच-पड़ताल के बाद रखा गया था। सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले में कस्‍टम अधिकारियों की भूमिका को खारिज नहीं किया जा सकता है। इससे पहले नीरव मोदी के मामले में खुलासा हुआ था कि वह लो क्‍वॉलिटी का हीरा ज्‍यादा कीमत में निर्यात करता था ताकि विदेशों से काला धन वापस भारत लाया जा सके।

भारत में कच्‍चे हीरे के आयात पर 0.25% ड्यूटी लगती है और व्‍यापार के आंकड़ों पर गौर करें तो दुनिया में बिकने वाला 95 फीसदी पॉलिश्ड डायमंड भारत से भेजा जाता है। हीरे के पैकेट को पहले कस्‍टम विभाग के एयर कार्गो यूनिट द्वारा स्‍वीकृति दी जाती है, इसके बाद यह व्‍यापारियों के पास जाता है।

सौजन्य से: नवभारत टाइम्स

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