भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कसना इतना मुश्किल काम है क्या?

Image result for sampadkiyaयह संपादकीय पढ़ कर भ्रष्ट अफसरों को बड़ी खुशी होगी की आज इन लोगों पर सरकारी कार्रवाई करना कितना मुश्किल हो गया है। बात शुरू करते है हमारे पास जगह-जगह से खबरें आ रही थी कि कई जगहों पर भ्रष्ट अफसर गलत काम कर रहे है और कई जगहों पर तो परिंदा भी पर नहीं मार सकता हमने भी यह ठाना की सारी जगहों की खबरे हम ऊपर तक पंहुचाऐंगे की बड़े अफसरों तथा बोर्ड में बैठे अधिकारियों को नीचे के विभाग के बारे में कितना पता है और वह किस तरह से इस सारे सिस्टम पर अपना कंट्रोल रखते है। आज देश में एक्सपोर्ट में जिस तरह आईजीएसटी रिफंड का धंधा चल रहा है। खाली कंटेनर, नकली बिल एक तरह का ही माल एक तरह के रेट पर भेजे जा रहे है। नकली एक्सपोर्ट करने और पकड़े जाने के आंकड़े सामने आ रहे है और डीआरआई तथा अन्य ऐजेंसियां सो रही है इसका कारण क्या है? क्या सरकार की तरफ से ऐसा इशारा है कि जो हो रहा है सब चलने दो। एक्सपोर्ट ज्यादा दिखाना है या कोई बड़ा सिंडिकेट इस सारे सिस्टम को चला रहा है। क्यों सरकार को पता नहीं फर्जी एक्सपोर्ट, फर्जी बिलिंग का? दूसरी बात की देश के चुने हुए भ्रष्ट अफसर कैसे पंहुच जाते है मलाईदार पदों पर क्या पैसा देकर आते है या जो बोर्ड में जो इनके गॉड फादर बैठे है जो अपने अफसरों को मलाईदार पदों पर बैठ कर सेवा करवाते है। डीआरआई फर्जी एक्सपोर्ट पर चुप क्यों है। फर्जी एक्सपोर्ट का पहला केस बनाया है डीआरआई ने कोलकाता में जिसमें 5 अफसरों को सस्पेंड भी किया गया। दिल्ली में ऐसा केस क्यों नही बनता जबकि दिल्ली में अरबों का फर्जी एक्सपोर्ट होता है।
विजिलेंस डिपार्टमेंट किस लिए होता है सिर्फ…………………….। क्यों नहीं करता कार्रवाई भ्रष्ट अफसरों पर जितने अफसर माल चैक करने के लिए इम्पोर्ट एक्सपोर्ट में लगाए जाते है उस से ज्यादा तो जांच ऐजेंसियां बनाई गई है। प्रिवेंटिव, डीआरआई, एसआईबी आदि इतनी ऐजेंसियां होने के बाद कैसे होती है स्मगलिंग? जहां-जहां प्रिंसिपल कमिश्नर, कमिश्नर ईमानदार बैठे है वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता ऐसा क्यों? उदहारण के लिए पड़पड़गंज, गुरूग्राम, दिल्ली आईजीआई एक्सपोर्ट तथा और भी कई जगह ऐसे है जहां गलत काम ना के बराबर होता है फिर बाकी जगह छूट क्यों?
कोलकाता, मद्रास, मुंबई, गुजरात के कई पोर्टों को स्मगलिंग के लिए खुला क्यों छोड़ रखा है। इन सारी बातों का जवाब जो हमे नजर आया की इसके पीछे खेल तो पैसे का ही है जिसमें सरकार की भी कही सहमति दिखती है नहीं तो भ्रष्ट अफसरों की संख्या ज्यादा नहीं है। जो कंट्रोल ना की जा सके उंगलियों पर गिने जा सकते यह लोग। किसी भी सीएचए से पूरी जन्म-पत्री ली जा सकती है इस भ्रष्ट अफसरों की। हम तो यही कहेंगे की आटे मे नमक ठीक है मगर नमक में आटा ठीक नहीं बाकी दुनिया से कुछ नहीं छुपता ईमानदारी का चौगा ओढ़े बड़े अधिकारियों की बॉडी लेग्वेज सब बोलती है नीयत भी साफ नजर आती है।
पूरी बात यह है कि आज आप किसी भ्रष्ट अफसर पर कार्रवाई करवाना चाहते है तो सबसे मुश्किल काम है। उसका एक ही आसान तरीका है कि उसे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़वाया जाये लेकिन यह भी बड़ा मुश्किल है। हर सरकारी डिपार्टमेंट में जगह-जगह विजिलेंस के नंबर दिए जाते है कभी कॉल करके देखो कोई कॉल उठाता है क्या? सब दिखावटी है। दिल्ली सरकार हो या केन्द्र सरकार सभी कहते है कि हमे भ्रष्ट अफसरों के बारे में बताओ हम पकडेंगे उन्हें। मगर आम आदमी की इतनी हिम्मत नहीं की वह यह कर सके भ्रष्ट अफसरों को पकड़वाना भी एक टेढ़ी खीर है।
मैं यह कहता हूं कि हर विभाग में भ्रष्ट लोगों के बारे में सबको पता होता है तो विजिलेंस डिपार्टमेंट का यह काम होता है की वह इन लोगों की पब्लिक डिलिंग में उनकी पोस्टिंग ना होने दे भ्रष्ट लोगों को पकड़ना पब्लिक का काम नहीं। विजिलेंस डिपार्टमेंट को इसी काम की सैलरी मिलती है कि वह इन पर नजर रखें दफ्तरों में इन्हे आराम करने की सैलरी नहीं देती सरकार।

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