भारत बिजनस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेवा प्रदाताओं को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर रखना चाहता है

नई दिल्ली  भारत बिजनस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेवा प्रदाताओं को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर रखना चाहता है। सरकार के इस फैसले की जानकारी रखने वाले दो सरकारी अधिकारियों ने बताया कि एक दिशा-निर्देश में बैकऑफिस सपोर्ट सर्विस प्रोवाइडर्स और इंटरमीडियरिज में स्पष्ट अंतर किए जाने की उम्मीद है, जिसे जीएसटी काउंसिल की लॉ रिव्यू कमिटी अंतिम रूप देने में लगी है।

महाराष्ट्र अथॉरिटी फॉर अडवांस रूलिंग (एएआर) के फैसले से 167 अरब डॉलर के आईटी और बीपीओ सेक्टर की जान सांसत में है। इस फैसले से मल्टीनेशनल कंपनियों की कैप्टिव यूनिट्स के साथ भारतीय कंपनियां भी प्रभावित होंगी। एएआर ने एक मामले में कहा था कि एप्लिकेंट ने जो बैक-ऑफिस सपोर्ट सर्विस दी है, उसे ‘सर्विस का एक्सपोर्ट’ नहीं माना जा सकता। उसने कहा था कि ये कंपनियां इंटरमीडियरी सर्विस दे रही हैं। गौरतलब है कि देश से होने वाले एक्सपोर्ट पर टैक्स नहीं लगता, क्योंकि इसमें कंजम्पशन विदेश में होता है। जीएसटी के पहले के सर्विस टैक्स सिस्टम में बैक-ऑफिस सर्विस को भी यह छूट मिली हुई थी।

एक अधिकारी ने कहा, ‘जल्द ही एक सर्कुलर जारी किया जाएगा। यह लॉ रिव्यू कमिटी के पास है। अगली बैठक में जीएसटी काउंसिल इसपर चर्चा कर सकती है।’ उन्होंने कहा कि इस तरह के स्पष्टीकरण से मदद मिलेगी। जीएसटी काउंसिल की बैठक 22 दिसंबर को होने वाली है।

उम्मीद जताई जा रही है कि सर्कुलर से इंटरमीडियरी सर्विसेज और बैक ऑफिस सपोर्ट सर्विसेज के बीच अंतर स्पष्ट कर दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अपनी पैरंट कंपनियों के साथ इंडियन बैक-ऑफिस सेवा प्रदाताओं को कैप्टिव बीपीओ द्वारा दी जाने वाली सेवाएं को निर्यात माना जाना चाहिए और उनपर देश में टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए। इंटरमीडियरी सर्विसेज पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है।

source NBT

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