भारत बन रहा है मोबाइल कंपनियों का हब

best-mobile-phonesनई दिल्ली : चीन में उत्पाद लागत बढ़ने से भारत में मोबाइल विनिमार्ण के लिए देसी और विदेशी कंपनियों के बीच होड़ मची है। लावा,कार्बन,विवो और फॉक्सकॉन सहित कई कंपनियों ने भारत में विनिमार्ण की शुरूआत कर दी है। कंपनियां 15,000 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने की तैयारी में है। चार-पांच सालों में इसमें दो लाख से अधिक लोगो को रोजगार मिलेगा। इसे मेक इन इंडि़या की शुरूआती सफलता के रूप के रूप में भी देखा जा सकता है।
वर्ष 2011 तक चीन में भारत के मुकाबले कारखाने के लिए जमीन की लागत 10 फीसदी कम थी। वहीं बिजली 30 फीसदी तक सस्ता था। इससे वहां मोबाइल कंपनियो का शुद्ध लाभ नौ फीसदी था जबकि भारत में यह 2/6 फीसदी था।
वर्ष 2015 तक चीन में मजदूरी 187 प्रतिशत बढ़ गई। चीन में मोबाइल कंपनियों में न्यूनतम मजदूरी 25,000 रूपये प्रति माह है। जबकि भारत में यह 7,000 से 8,000 रूपये प्रति माह है। घरेलू कंपनी लावा ने वर्ष 2012 तक कई चरणों में नोएडा और तिरूपति में 2,615 करोंड रूपये निवेश की योजना बनाई है। इसमें कुल 60 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। वह शुरूआती 100 करोड रूपये निवेश कर चुकी है। स्पाइस 500 करोड़ रूपये, सैमसंग 517 करोड़, जियानी 300 करोड़ रूपये, कार्बन 200 करोड़ रूपये और विवो 125 करोड़ रूपये का निवेश कर रही है। ज्यादातर कंपनीयों ने पिछले साल शुरूआती निवेश के साथ संयत्रा शुरू कर दिया है। कंपनी ने लावा वी5 4जी स्मार्टफोन पेश किया। इसकी कीमत 11,400 रूपये है। इसमें 13 मेगा पिकसल का रियर और आठ मेगा पिक्सल का फं्रट कैमरा है। रैम तीन जीबी और मेमोरी 16 जीबी है जिसे 32 तक बढ़या जा सकता है। अमेरिकी कंपनी ने कहा है कि भारत में बढ़ते स्मार्ट फोन बाजार में दीर्घकालिन स्तर पर निवेश करती रहेगी। एप्पल के सीईओ टिम कुक ने निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में आईफोन की कुल बिक्री 76 प्रतिशत बढ़ी है।

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