बजट में एक्साइज ड्यूटी व सर्विस टैक्स में कटौती के आसार

नई दिल्ली : अप्रैल-2016 से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू हो सकता है। सरकार ने यह मंशा भी जता दी है। अगर सरकार की अपनी इस मंशा पर कायम है तो निश्चित तौर से इस बार के बजट में सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी में कटौती नजर आएगी। स्वाभाविक है कि इसका लाभ आम जनता को मिलेगा। कुछ सर्विस यानी सेवाएं सस्ती हो जाएंगी और कुछ सामान सस्ते हो जाएंगे। सरकार को अगले वित्त वर्ष से जीएसटी लागू करना है। सरकार जीएसटी की दर 16 से 17 पर्सेंट तक रखना चाहती है, जबकि राज्य 20 से 24 पर्सेंट पर अड़े हैं। सरकार के लिए जरूरी है कि वह सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी की दरों को इतना तर्कसंगत बना दे, जिससे जीएसटी की दर 16 या 17 पर्सेंट करने में परेशानी न हो। सरकार को यह साबित करने का मौका मिलेगा कि जीएसटी लागू होने से केंद्र या राज्यों की आमदनी में अंतर नहीं आएगा। जहां तक इंपोर्ट, एसटीटी और कैपिटल गेन की बात है तो सरकार छेड़छाड़ नहीं करेगी। इंपोर्ट का बिल कम हो रहा है, जिससे पूरा फोकस एक्सपोर्ट पर रहेगा। ऐसे में एक्साइज ड्यूटी घटाने से फायदा होगा। पीएम और वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि इनडायरेक्ट टैक्स का कलेक्शन उम्मीद के अनुसार नहीं है। इसलिए
मोदी सरकार इस बात का संकेत दे चुकी है कि बजट में मेक इन इंडिया कॉन्सेप्ट पर फोकस रखा जाएगा। यही कारण है कि सरकार इस बार एक्साइज ड्यूटी को लेकर काफी राहत दे सकती है, ताकि भारत में उत्पादन करने में विदेशी या देशी कंपनियों को परेशानी न हो और कम एक्साइज ड्यूटी का लाभ उठाते हुए इकॉनमी और मार्केट को लाभ पहुंचाए। 
जहां तक सर्विस टैक्स की बात है तो बजट परंपरा रही है कि सरकार, हर बजट में सर्विस टैक्स का दायरा बढ़ा देती है। इस बार इस परंपरा को मोदी सरकार को जारी रखना मुश्किल होगा, क्योंकि यूपीए सरकार ने पहले ही सर्विस टैक्स को लेकर ब्लैक लिस्ट से निकाल दिया है। इसके अनुसार ब्लैक लिस्ट में जितनी सेवाएं हैं, उनको छोड़कर अन्य सेवाओं पर सर्विस टैक्स लगेगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार इस बार सर्विस टैक्स की दरों में कटौती कर सकती है। साथ ही सर्विस टैक्स पर लग रहे एजुकेशन सेस को भी हटाया जा सकता है। इससे सरकार को ज्यादा फायदा नहीं हो रहा है। इस सेस के चलते सर्विस टैक्स 12.36 प्रतिशत हो गया है। कुल सर्विस टैक्स पर 0.36 प्रतिशत ही सेस लगता है। इसके अलावा जो संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ लग रहा है कि सरकार सिक्युरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) और कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है।
स्रोत : नवभारत टाइम्स 18, फ़रवरी 2015

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