पीथमपुर आईसीडी में एक्सरे मशीन न होने से हो रहा भारी नुकसान

एम.पी। रानीपुरा में सात लोगों की मौत के लिए जितने जिम्मेदार दुकानदार हैं, उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदार सेंट्रल एक्साइज और प्रशासन के वे अधिकारी हैं, जिनके कारण इंदौर चीन से अवैध रूप से मंगाए गए पटाखों के व्यापार का गढ़ बन चुका है। इम्पोर्ट पर प्रतिबंध के बावजूद चाइना से दूसरे सामान की आड़ में पटाखे पीथमपुर इन लैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) में पहुंचाए जाते हैं। वहां से कंटेनर को बिना खोले पीथमपुर में ही बने स्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) में भेजा जाता है। फिर वहां से सेंट्रल एक्साइज की मिलीभगत से इन्हें पूरे प्रदेश में भेजा जाता है। इस व्यवसाय में मुनाफा इतना ज्यादा है कि एक्साइज और प्रशासन के जिम्मेदार चुप्पी साधे रहते हैं।
पटाखों का आयात करना कानूनन प्रतिबंधित है लेकिन दो-तीन बड़े व्यापारी मिलकर दूसरे सामान की आड़ में कंटेनर बुलाते हैं। यह कंटेनर बिना जांच किए पीथमपुर में बने सेज में व्यापारी के गोदाम में पहुंचा दिए जाते हैं।
वहां से इन्हें इंदौर, भोपाल और प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में भेजा जाता है। केमिकल के नाम पर लाते हैं पटाखे पीथमपुर ही क्यों? पीथमपुर के इन लैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) में एक्स-रे मशीन नहीं थी। इसका फायदा उठाते हुए व्यापारी पटाखों के कन्साइनमेंट को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट मुंबई में न खुलवाकर पीथमपुर के आईसीडी में बुलवाते आए हैं। चूंकि सामान सेज में जाना होता है। इसलिए यहां भी कंटेनर खोलकर जांच नहीं की जाती।
इसके बाद सेज के अधिकारियों से मिलीभगत कर वहां से दूसरे सामान की आड़ में माल व्यापारियों के अवैध गोदामों तक पहुंचा दिया जाता है। इनमें से कई गोदाम रानीपुरा के अलावा खंडवा रोड, सिंधी कॉलोनी, राऊ के रहवासी क्षेत्रों में भी हैं। 10 गुना कीमत में बिकते हैं चाइनीज पटाखे चाइनीज और भारत में बने पटाखों की होलसेल कीमत में करीब पांच गुना अंतर है, जबकि रिटेल प्राइज लगभग एक जैसी है। खुदरा मार्केट तक आते-आते यह मुनाफा 10 गुना तक पहुंच जाता है।

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