पड़ोसी देशों के साथ संपर्क सुविधा का निर्माण भारत की पहली प्राथमिकता: स्वराज

हनोई। चीन की ओर से ‘बेल्ट एंव रोड’ पहल को बढ़ावा देने के बीच विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संपर्क सुविधा बेहतर बनाने को प्राथमिकता दे रहा है। इसके लिये अधिक वह पहले से अधिक संसाधन लगा रहा है। स्वराज ने वियतनाम की राजधानी में आयोजित तीसरे हिंद महासागर सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध एक-दूसरे पर निर्भर दुनिया की विशेषता है। समुद्री संसाधनों का बहुत ज्यादा दोहन नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा कायम करने के लिए हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) को एक महत्वपूर्ण साधन मानता है। स्वराज ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुये कहा कि वह दूरदराज क्षेत्रों को जोड़ने और क्षेत्रीय संपर्क विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हमारी सरकार ‘सागरमाला’ परियोजना के तहत नये बंदरगाह बना रही है और पुराने का आधुनिकीकरण कर रही है। साथ ही अंतर्देशीय जलमार्गों और दूरदराज के क्षेत्रों का विकास भी कर रही है। समुद्री लॉजिस्ट्किस बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिये ये सारी कवायद की जा रही है।

पड़ोसी देशों के साथ संपर्क सुविधा का निर्माण भारत की पहली प्राथमिकता: स्वराज

विदेश मंत्री ने कहा कि इन चीजों को हमारी सीमाओं से परे ले जाने के लिये आज भारत अधिक से अधिक संसाधन लगा रहा है और अपने पड़ोसी देशों के साथ संपर्क और सहयोग स्थापित करने को प्राथमिकता दे रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2013 में बेल्ट एंड रोड पहल की शुरूआत की। इसके जरिये चीन पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका समेत अन्य देशों में आधारभूत संरचना का निर्माण करके अतंररराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है।

स्वराज ने कहा कि भारत रेल और सड़क परिवहन से बिजली उत्पादन तक, बंदरगाह एवं जलमार्ग परिवहन से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में परियोजनायें विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत “एक्ट ईस्ट” नीति पर नये सिर से जोर दे रहा है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र को लेकर नयी “थिंक वेस्ट” नीति पर भी जोर दे रहा है।

सौजन्य सेः प्रभा साक्षी

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