दिल्ली आईसीडी पड़पड़गंज में पटाखों के कई कंटेनर जब्त किये गये, एसईजैड के तहत भारी संख्या में कंटेनर निकल जाने की खबर

आईसीडी पड़पड़गंज में 3 कंटेनर पटाखों के पकड़े। सूत्रों के अनुसार 82 कंटेनर अभी तक निकाले जा चुके है इनमें पटाखों के अलावा क्या-क्या था यह जांच का विषय है। यह कंटेनर एसईजैड स्कीम के तहत बिना ड्यूटी के निकाले गये। इसमें भी अफसरों की मिलीभगत का पूरा अंदेशा है। देखा जाये तो कस्टम के उपर यह एक काला धब्बा है। इतने कंटेनर निकल गये मगर किसी का ध्यान नहीं गया। वैसे तो यहां के कमिश्नर बीबी गुप्ता एक ईमानदार अफसर बताये जाते है। मगर लोगों का मुंह तो बंद नहीं किया जा सकता।
नई दिल्ली : चाइनीज पटाखों के आयात पर पाबंदी कायम है और कस्टम डिपार्टमेंट ने कई ऐसे कंटेनर जब्त किए हैं जिनमें चोरी-छिपे चाइनीज पटाखे लाए जा रहे थे। विभाग बल्क डीलर्स और इम्पोर्टर्स की कड़ी निगरानी कर रहा है और बाजारों में भी छानबीन की तैयारी है। हालांकि मार्केट सूत्रों का कहना है कि पटाखों का ज्यादातर अवैध इम्पोर्ट हो चुका है और चोरी-छिपे इनका डिस्ट्रिब्यूशन भी हो रहा है।
पटाखों के सबसे बड़े होलसेल केंद्र सदर बाजार में अभी डीलर्स को टेंपररी लाइसेंस नहीं मिले हैं, लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी उन्हें पुलिस को यह लिखकर देना होगा कि वे चाइनीज पटाखे नहीं बेचते। एक ट्रेडर ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया सदर का सिर्फ नाम है, राजधानी के कई इलाकों और वेयरहाउसेस से पटाखों की गुपचुप सप्लाई हो रही है। जिन्हें माल मंगाना था, वो मंगा चुके हैं। हालांकि त्योहार नजदीक आते ही 70 पसेट तक सस्ते चाइनीज पटाखों के लिए भारी डिमांड आती है और यहां भी ट्रेडर खुलकर बेचना शुरू कर देते हैं। दिल्ली सरकार ने दो दिन पहले केंद्र को पत्रा लिखकर मांग की थी कि चाइनीज पटाखों पर पाबंदी लगाई जाए। उसने चाइनीज पटाखों से होने वाले स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी नुकसान का हवाला दिया था। कस्टम विभाग के एक अधिकारी ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा चाइनीज पटाखों के आयात पर रोक जारी है। दिल्ली के पटपड़गंज सहित कई इनलैंड कंटेनर डिपो से पिछले हफ्ते अवैध पटाखों वाले कंटेनर जब्त किए गए हैं। संभावित ठिकानों पर नजर रखी जा रही है। इस साल से शादियों और दूसरे मकसद से मंगाए जाने वाले कुछ फायर प्रॉडक्ट्स की केमिकल टेस्टिंग भी अनिवार्य कर दी गई है।
अधिकारी ने बताया कि इसके लिए अलग से कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, लेकिन पिछले महीने खुद कॉमर्स मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कर दिया था कि सरकार ने पिछले साल जारी सर्कुलर वापस नहीं लिया है।
जानकार बताते हैं कि चाइनीज पटाखों में पोटैशियम क्लोरेट का इस्तेमाल होता है, जिसकी कीमत 50-60 रुपये किलो है, जबकि देसी पटाखे एल्युमीनियम पाउडर और पोटैशियम नाइट्रेड से बनाए जाते हैं, जिन पर लागत 5-6 गुना ज्यादा बैठती है। ऐसे में देसी पटाखे चाइनीज के मुकाबले इसी अनुपात में महंगे भी होते हैं। बाजारों सूत्रों का कहना है कि अब सिर्फ चोरी-छिपे पटाखे आ रहे हैं। ये खिलौनों या सजावटी सामान के कंसाइनमेंट में छिपाकर लाए जाते हैं। चूंकि पोर्ट या आईसीडी पर रैंडम चेकिंग होती है, ऐसे में कुछ माल बाजार तक पहुंचने में कामयाब रहता है।

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