दिल्ली आईसीडी तुगलकाबाद में एक्सपोर्ट कमिश्नर को बदला जाना कितना ठीक और कितना गलत?

नई दिल्ली : दिल्ली आईसीडी तुगलकाबाद एशिया का सबसे बड़ा ड्राई-पोर्ट यहां का कमिश्नर होना गर्व की बात है। यहां कमिश्नर बने के बाद वह कमिश्नर ट्रांसफर होकर कहीं भी चला जाये। मगर एक बात साथ रहती है कि यह वहीं कमिश्नर है जो आईसीडी तुगलकाबाद में भी रहा है। हाल ही में कमिश्नर एक्सपोर्ट अनिल मिश्रा को लगाया गया। अभी काम समझ ही रहे थे कि उनका तबादला कर दिया गया। एक कमिश्नर लेवल के अफसर का पहली बार इस तरह आईसीडी में हौंसला तोड़ा गया यह सोचने का विषय है। यह तबादला क्यों किया गया, क्या कोई कम्पलेन थी?ऐसा क्या वाक्य हुआ कि जो इतनी जल्दी इनको हटाना पड़ा। किसकी जीत हुई किसकी हार, स्मगलर जीते या सही काम करने वाले यह सोचने का विषय है। एक्सपोर्ट में अभी अतुल दीक्षित के जेल जाने की गरमी बनी हुई थी कि इन कमिश्नर ने आ कर और मामला टाईट कर दिया।
सूत्र बताते है कि गलत काम करने वाले तो परेशान हुए ही सही काम करने वाले भी डर गये। बात ऊपर तक इतनी जल्दी पहुंचाई गई और नतीजा ट्रांसफर कर दिया गया। अफसरों की माने तो पोर्ट के आंकड़े बताते है कि कोई काम कम नहीं हुआ। मगर एक्सपोर्टरों की मानें तो काम कम हुआ, काम बढ़ा या कम हुआ यह बाद की बात है। अफसरों का हौंसला जरुर हिला। कम्पलेन करने वालों का हौंसला बहुत बढ़ा कि अब आये कोई मैदान में इसी तरह उसकी किल्ली गिरा दी जायेगी। क्या मैसेज दिया सरकार ने? क्या यह अफसर गलत है? अगर गलत था तो पहले लगाया क्यों गया। किस की सिफारिश पर लगाया गया।
अगर कुछ खास लोगों की बातों को ठीक समझा जाये तो इस कमिश्नर की पड़पड़गंज के लिए सिफारिश की गई थी। मगर वहां पोस्टींग नहीं हो सकी आईसीडी तुगलकाबाद में अतुल दीक्षित के जाते ही यहां जगह खाली हुई तो यहां सेट कर दिया गया। कुछ भी हुआ सरकार की तरफ से मैसेज अच्छा नहीं आया। जख्मी एक अफसर को तो नहीं एक इंसान को जरुर किया गया। अफसर का काम है ड्यूटी करना कहीं भी लगाया जाये सरकार की नौकरी करनी है। मगर इंसानी जज्बात को देखा जाये तो मरने जैसी बात है बिना कुछ करे-धरे रुकसत कर दिया गया। हनीमून से पहले तलाक वाली बात फिट बैठती है।
सूत्रों की माने तो 20 दिन के अंदर एक-दो बड़े फ्रॉड का भी पर्दाफाश किया गया। जोकि एक्सपोर्ट शेड में हो रहे थे।

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