टैक्स चोरों को जाना पड़ेगा जेल

नई दिल्ली: टैक्स चोरी को शीघ्र ही उस अपराध (प्रॉसिक्यूटेबल ऑफेंस) की श्रेणी में रखा जाएगा जिसके जुर्म में दोषियों को जेल की सजा हो सकती है।  काले धन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सरकार को यह सुझाव दिया है और 31 मार्च तक फैसला करने के लिए कहा है।
सुप्रीम कोर्ट को एसआईटी ने बताया, ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) आयकर अधिनियम के उस विशिष्ट प्रावधान पर गौर कर रहा है जिसके तहत इसे प्रॉसिक्यूटेबल ऑफेंस के दायरे में रखा जाएगा और 31 मार्च 2015 तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।’
सुप्रीम कोर्ट ने जहां टैक्स चोरों पर शिकंजा कसने का आदेश दिया है वहीं सैलरी वर्ग के लोगों को राहत दी है । इसने स्पष्ट किया है कि वेतनभोगी और छोटे करदाताओं को परेशानी से बचाने के लिए सरकार आयकर सीमा बढ़ा सकती है।
अभी तक टैक्स चोरी को प्रॉसिक्यूटेबल ऑफेंस नहीं समझा जाता है। कोई भी व्यक्ति टैक्स चोरी करते पाए जाने पर अथॉरिटी के समक्ष अपने गुनाह को कबूल सकता है और आयकर अधिनियम के तहत लगने वाले भारी जुर्माने के साथ टैक्स चोरी की रकम का भुगतान करके जेल जाने से बच सकता है। यदि व्यक्ति टैक्स चोरी के लिए टैक्स और जुर्माना नहीं देता है तो अथॉरिटी बकाया हासिल करने के लिए उसकी संपत्ति को जब्त कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने काले धन पर जस्टिस एम.बी.शाह और अरिजित पसायत के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी ने टैक्स चोरी को पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट), 2002 के तहत अपराध बनाने का सुझाव दिया है। एसआईटी की पैरवी कर रहे पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली जे.सोराबजी ने अदालत को बताया कि टैक्स चोरी पहले से कानूनी अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। लिखित सुझाव में सोराबजी ने कहा, ‘यह सुझाव दिया जाता है कि टैक्स चोरी को भारत में भी कानूनी अपराध बनाया जाए जिस तरह से इसे अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिय में कानूनी अपराध बनाया गया है।
एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच को यह भी बताया कि फॉरन एक्सचेंज मैनेजमेंट ऐक्ट (फेमा) के तहत प्रभावी कदम उठाना सरकार के लिए मुश्किल है। फेमा में प्रावधान है कि सरकार विदेश में जमा किए गए काले धन पर टैक्स चोरी करने वाले भारतीय व्यक्ति की विदेश स्थित प्रॉपर्टी को जब्त कर सकती है।’
विदेश स्थित प्रॉपर्टी को जब्त करने के बारे में सोराबजी ने बताया कि ऐसी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि फेमा के प्रावधानों में संशोधन करना होगा। विदेश स्थित संपत्ति को जब्त करने की बजाए फेमा में यह प्रावधान किया जाए कि दोषी व्यक्ति की अपने देश के अंदर स्थित उस प्रॉपर्टी को सरकार जब्त कर सकती है, जिसका मूल्य दोषी व्यक्ति की विदेश स्थित प्रॉपर्टी के बराबर हो। एसआईटी ने सुझाव दिया है कि सरकार को प्रस्तावित संशोधन को प्रभावी बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई करना चाहिए।
एसआईटी ने काले धन पर रोक लगाने के लिए प्रति व्यक्ति नकदी रखने की सीमा निर्धारित करने को भी कहा है क्योंकि देश के अंदर काला धन रखने का यह सबसे प्रमुख उपाय है। नकदी लेन-देन के स्थान पर चेक/बैंक ट्रांसफर के माध्यम से लेन-देन का सुझाव एसआईटी ने दिया है। एक व्यक्ति के पास अधिक से अधिक 15 लाख रुपए रखने की अनुमति देने का प्रावधान बनाने को कहा है।
एसआईटी ने फर्जी बिल पर भी अंकुश लगाने का सुझाव दिया है क्योंकि यह काले धन पर पर्दा डालने के कारगर उपायों में से एक है। एसआईटी के सुझाव के अनुसार, खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए बिल पर अपने पैन नंबर का उल्लेख अनिवार्य बनाया जाए।
एसआईटी ने भारत के एक्सपोर्ट/इंपोर्ट डेटा और अन्य देशों के एक्सपोर्ट/इंपोर्ट डेटा की जांच करने के लिए एक इकाई गठित करने का सुझाव दिया है। एसआईटी के अनुसार, अमेरिका ने जिस प्रकार ट्रेड ट्रांसपैरेंसी इकाई का गठन किया है, उसी प्रकार की इकाई का भारत में भी गठन किया जाए। इससे सरकार को पता चल जाएगा कि कितना काला धन देश से बाहर भेजा गया है।
स्रोत : नवभारत टाइम्स

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