जीएसटी लागू होने के समय से जिन राहतों की मांग कर सलाहकार, व्यापारिक संगठनों द्वारा की जा रही थी, उन पर जीएसटी काउंंसिल में काम एकदम से तेज हो गया

Image result for gstNew Delhi जीएसटी लागू होने के समय से जिन राहतों की मांग कर सलाहकार, व्यापारिक संगठनों द्वारा की जा रही थी, उन पर जीएसटी काउंंसिल में काम एकदम से तेज हो गया। खासकर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में तीन राज्य जिस तरह भाजपा के हाथ से निकल गए, उसके बाद अब कारोबारियों को साधने की रणनीति बनाई जा रही। यह इसी से नजर आ रहा कि कारोबारियों ने सालाना रिटर्न भरने की तारीख 31 मार्च करने की मांग की थी, जिसे मान लिया गया था, लेकिन अब बिना मांगे ही इस तारीख को 30 जून तक बढ़ा दिया गया। जानकारों का कहना है सालाना रिटर्न कठिन साबित होना है। ऐसे में यदि मार्च में अंतिम तारीख के समय इसमें कोई समस्या आई तो कारोबारियों का गुस्सा अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव पर असर दिखा सकता है। इसलिए अंतिम तारीख चुनाव बाद की ही कर दी गई।

इसी तरह रिफंड के लिए एक साल से परेशान कारोबारियों को भी राहत मिली है और इसके लिए एक ही विभाग कार्रवाई करेगा। साथ ही कारोबारियों को इलेक्ट्रॉनिकली आवेदन करना होगा। एक अन्य राहत इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर मिली है। इसमें पुराने क्लेम करने से चुके कारोबारी अब मार्च तक रिटर्न भरने के साथ क्लेम कर सकेंगे। रिटर्न लेट भरने पर विलंब शुल्क माफ कर दिया जाएगा। साथ ही जो कारोबारी रजिस्ट्रेशन में चूक कर गए, उन्हें फिर मौका मिलेगा कि वह जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कर दें।

गब्बर सिंह टैक्स नारे को खत्म करने की कोशिश

दरअसल जीएसटी को राहुल गांधी ने गब्बर सिंह टैक्स बोलकर इसके विरोध को नई हवा दी थी। चुनाव के दौरान भी इस पर जमकर बयानबाजी हुई थी, खासकर अधिक टैक्स दर व जटिल रिटर्न को लेकर। इसका प्रभाव खत्म करने के लिए जीएसटी काउंसिल की बैठक के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दिया कि जीएसटी के अधिकतम टैक्स स्लेब 28 फीसदी से 99 फीसदी वस्तुएं हट जाएंगी। काउंसिल ने कुछ वस्तुओं से दरें कम भी की और अब वित्तमंत्री अरुण जेटली का बयान है कि नई टैक्स स्लैब 12 और 18 फीसदी के बीच लाने का विचार है। इससे तय है कि आने वाली जीएसटी काउंसिल में कई वस्तुओं पर टैक्स दर कम होगी।
जीएसटी लागू होने के समय से जिन राहतों की मांग कर सलाहकार, व्यापारिक संगठनों द्वारा की जा रही थी, उन पर जीएसटी काउंंसिल में काम एकदम से तेज हो गया। खासकर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में तीन राज्य जिस तरह भाजपा के हाथ से निकल गए, उसके बाद अब कारोबारियों को साधने की रणनीति बनाई जा रही। यह इसी से नजर आ रहा कि कारोबारियों ने सालाना रिटर्न भरने की तारीख 31 मार्च करने की मांग की थी, जिसे मान लिया गया था, लेकिन अब बिना मांगे ही इस तारीख को 30 जून तक बढ़ा दिया गया। जानकारों का कहना है सालाना रिटर्न कठिन साबित होना है। ऐसे में यदि मार्च में अंतिम तारीख के समय इसमें कोई समस्या आई तो कारोबारियों का गुस्सा अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव पर असर दिखा सकता है। इसलिए अंतिम तारीख चुनाव बाद की ही कर दी गई।

इसी तरह रिफंड के लिए एक साल से परेशान कारोबारियों को भी राहत मिली है और इसके लिए एक ही विभाग कार्रवाई करेगा। साथ ही कारोबारियों को इलेक्ट्रॉनिकली आवेदन करना होगा। एक अन्य राहत इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर मिली है। इसमें पुराने क्लेम करने से चुके कारोबारी अब मार्च तक रिटर्न भरने के साथ क्लेम कर सकेंगे। रिटर्न लेट भरने पर विलंब शुल्क माफ कर दिया जाएगा। साथ ही जो कारोबारी रजिस्ट्रेशन में चूक कर गए, उन्हें फिर मौका मिलेगा कि वह जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कर दें।
source by dainik bhaskar

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