जीएसटी क्रेडिट के आड़े आएगा अधूरा रिटर्न!

नई दिल्ली
सरकार ने जीएसटी रिटर्न के फॉर्म GSTR-2 और 3 खत्म कर अगले वित्त वर्ष तक कारोबारियों को सिर्फ GSTR-1 और 3B भरने की छूट तो दे दी है, लेकिन कई कानूनी प्रावधान अब इनपुट टैक्स क्रेडिट की राह में रोड़ा बनते दिख रहे हैं। कानूनन 2017-18 के किसी भी इनवॉइस के लिए क्रेडिट सितंबर रिटर्न की डेडलाइन या सालाना रिटर्न तक लिया जा सकता है। अभी तक सालाना रिटर्न का फॉर्म ही नहीं आया है और मौजूदा GSTR-3B में इनवॉइस डिटेल्स भरने का प्रावधान नहीं होने से कारोबारियों को कई जटिलताएं पेश आ सकती हैं। ट्रेड-इंडस्ट्री में मांग की जा रही है कि सरकार सालाना रिटर्न पर अपना रुख साफ करे या कानून में संशोधन करे।
जीएसटी एक्सपर्ट राकेश गुप्ता ने बताया कि सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन 16(4) के मुताबिक 2017-18 की किसी इनवॉइस पर सितंबर 2018 की रिटर्न या एनुअल रिटर्न की डेडडलाइन तक ही क्रेडिट लिया जा सकता है। सालाना रिटर्न की डेडलाइन वैसे तो दिसंबर तक है, लेकिन सरकार ने अभी तक यह फॉर्म ही जारी नहीं किया है। ऐसे में क्रेडिट की डेडलाइन 20 अक्टूबर 2018 दिख रही है। चूंकि जीएसटीआर-2 और 3 खत्म हो चुके हैं और अगले वित्त वर्ष से नया रिटर्न सिस्टम लाने की बात हो रही है, ऐसे में पूरा प्रोसेस कानूनन अधूरा है और कारोबारी केवल इस भरोसे पर काम कर रहे हैं कि 3बी के आधार पर ही उनका क्रेडिट मिल जाएगा। 3बी का प्रावधान शुरू में केवल छह महीने के लिए प्रोविजनल रिटर्न के लिए था। तब सेक्शन 16(4) और सालाना रिटर्न की जरूरत पैदा नहीं हो रही थी। अब बहुत से लोग आशंका जता रहे हैं कि इस डेडलाइन के बाद उनके फंसे रिटर्न का क्या होगा।

सीए रंजन कुमार ने बताया कि GSTR-3B में इनवॉइस नंबर या तारीख डालने का कोई प्रावधान नहीं है। इससे यह भी पता नहीं चलता कि जिस इनवॉइस का क्रेडिट क्लेम किया गया है, वह मौजूदा वित्त वर्ष का है या पिछले साल का। उन्होंने कहा कि 21 महीने तक आधे अधूरे रिटर्न के चलते भविष्य में कई दिक्कतें आ सकती हैं और मौजूदा समस्या उनमें से एक है। अगर GSTR-2B प्रभावी होता तो सिस्टम आसानी से 2017-18 के इनवॉइसेज की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कर सकता था। अब क्रेडिट प्रोसेस करने में मानवीय दखल की जरूरत होगी, जिससे पूछताछ या शोषण भी बढ़ सकता है

सौजन्य से: नवभारत टाईम्स

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