जीएसटी के लिए अलग ऑडिट कराने का हो प्रावधान

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के वस्तु एवं सेवा कर विभाग द्वारा शिकायत निवारण समिति की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें महाकौशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा जीएसटी में आ रही कठिनाइयों को रखा साथ ही इन्हें दूर करने के लिए सुझाव भी दिए। दरअसल शिकायत निवारण समिति की यह पहली बैठक थी, जिसमें विभाग की ओर से आला अधिकारी मौजूद रहे। इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए दिए गए समाधान को अमल में लाने का अधिकारियों ने आश्वासन भी दिया। महाकोशल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि गुप्ता ने बताया कि वस्तु एवं सेवाकर लागू हुए 3 साल हो गए हैं, लेकिन अभी भी व्यापारियों को इसमें समस्या आ रही है।

दो विभाग, दोनों में अलग-अलग ऑडिटः

उन्होंने कहा कि अभी भी जीएसटी में कई भ्रांतियां हैं, जिसे जल्द से जल्द दूर किया जाए, ताकि करदाताओं को राहत मिले। शिविर के दौरान चैंबर की ओर से कहा गया कि नए कर प्रावधानों के तहत जीएसटी के लिए अलग ऑडिट कराने का प्रावधान रखा गया है, जबकि आयकर अधिनियम के तहत कर दाताओं द्वारा पहले से ही ऑडिट कराया जा रहा है। दोहरे ऑडिट के स्थान पर शासन द्वारा ऑडिट के नए प्रारूप के माध्यम से ऑडिट करने पर भी शासन के अंतर्गत आने वाले दोनों विभाग, आयकर एवं जीएसटी की आवश्यकता पूर्ण हो सकती है। चैंबर के सहमंत्री अखिल मिश्रा ने बताया कि बैठक में जीएसटीएन कौसिंल के दो वाइस प्रेसिडेंट सहित दोनों प्रदेश के विभाग से जुड़े अधिकारियों ने भी इस दौरान बात रखी।

 

सौजन्य सेः नई दुनिया

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