जीएसटी के तहत पिछले फाइनैंशल इयर के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट से कंपनियां हाथ धो सकती हैं।

नई दिल्ली  जीएसटी के तहत पिछले फाइनैंशल इयर के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट से कंपनियां हाथ धो सकती हैं। अगर उन्होंने इस क्लेम के सपॉर्ट में वेंडरों के रिटर्न नहीं मुहैया कराए तो उन्हें यह रकम नहीं मिलेगी। यह क्लेम फाइल करने की डेडलाइन 20 अक्टूबर है, जबकि वेंडर अपना सेल्स रिटर्न 31 अक्टूबर तक फाइल कर सकते हैं। इसके चलते ऐसी स्थिति बन सकती है, जिसमें वेंडर का रिटर्न मिलान के लिए उपलब्ध न हो।

इंडस्ट्री असोसिएशंस ने डेडलाइन बढ़ाने की मांग सरकार से की है। एसोचैम ने फाइनैंस मिनिस्ट्री को दिए गए ज्ञापन में कहा, ‘जीएसटीआर-3बी फाइल करने की कट-ऑफ डेट के आधार पर अगर टैक्स अथॉरिटीज इनपुट टैक्स क्रेडिट न देने पर अड़ जाएं तो टैक्सपेयर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाएगा, जिसे वे ऐक्ट के प्रावधानों के अनुसार पाने का वाजिब हक रखते हैं।’

जुलाई 2017 में शुरू किए गए जीएसटी सिस्टम में इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने के लिए मैचिंग का कॉन्सेप्ट जोड़ा गया था। यानी बायर को इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम लेने के लिए जीएसटीएन पोर्टल पर सप्लायर की ओर से फाइल किए गए रिटर्न में चुकाए गए टैक्स से मिलान करना होगा।

हालांकि इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी से जुड़ी परेशानियों के कारण ऑनलाइन मैचिंग पर रोक लगा दी गई और टैक्सपेयर्स को मंथली समरी रिटर्न यानी जीएसटीआर-3बी में सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर प्रोविजनल क्रेडिट क्लेम करने की इजाजत दी गई। अधिकतर कारोबारियों और कंपनियों ने प्रोविजनली क्लेम किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान नहीं किया था।

कई मामलों में सप्लायर ने महीनों तक रिटर्न फाइल नहीं किया, लेकिन बायर ने उन्हें चुकाए गए टैक्स पर इनपुट क्रेडिट क्लेम किया। हालांकि जीएसटी लॉ में साफ कहा गया है कि अगर सप्लायर ने सरकार को टैक्स नहीं चुकाया हो तो बायर को इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने का अधिकार नहीं है।

कानून में यह भी कहा गया है कि फाइनैंशल इयर 2017-18 की इनवाइसेज से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामले में कोई एडजस्टमेंट सितंबर 2018 के लिए जीएसटी रिटर्न फाइल करने के बाद क्लेम नहीं किया जा सकता है, चाहे वह एडिशनल हो या रिवर्सल। सितंबर 2018 के लिए जीएसटी रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 20 अक्टूबर 2018 है।

अब कारोबारी और कंपनियां वेंडरों के रिटर्न से क्रेडिट मैच कराने की आपाधापी में हैं। बायर्स को किसी भी मिसमैच की जानकारी सप्लायर को देनी होगी। सप्लायर को अपने आगामी जीएसटी रिटर्न यानी जीएसटीआर 1 में सुधार का कदम उठाना होगा।

सरकार ने पिछले महीने जीएसटीआर 1 फाइल करने की डेडलाइन बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दी थी। तो इस तरह वेंडर सही आंकड़ों वाले जीएसटीआर 1 को 31 अक्टूबर तक फाइल कर सकता है, वहीं बायर को अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट में एडजस्टमेंट 20 अक्टूबर तक ही करना है। ऐसे में मिलान का कदम यह मानकर उठाना पड़ेगा कि वेंडर ट्रांजैक्शन की सही जानकारी देगा या पिछले रिटर्न ट्रांजैक्शंस में 31 अक्टूबर से पहले बदलाव कर देगा।

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