छाबर पोर्ट भारत और ईरान मिलकर बनाएंगे

तेहरान :  अमेरिका की आपत्तियों के बावजूद भारत ने  छाबर पोर्ट को विकसित करने के लिए ईरान के साथ समझौते पर हस्‍ताक्षर कर दिए हैं। रणनीतिक रूप से छाबर पोर्ट भारत के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। यह भारत को पाकिस्‍तान को बाइपास कर अफगानिस्‍तान के लिए समुद्री रास्‍ता उपलब्‍ध कराएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को ईरान यात्रा पर पहुंचे हैं। यहां दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद इस समझौता पत्र पर हस्‍ताक्षर किए गए। ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रूहानी ने गडकरी के साथ बैठक में कहा कि भारत और ईरान के बीच छाबर पोर्ट को विकसित करने वाला समझौता दोनों देशों के बीच के सहयोगी रिश्‍ते को एक नई दिशा प्रदान करेगा।
भारत छाबर पोर्ट में दो बर्थ का पट्टा 10 साल के लिए लेगा। पोर्ट का विकास स्‍पेशल पर्पज व्‍हीकल के जरिये किया जाएगा, जिसमें 8.521 करोड़ डॉलर का निवेश किया जाएगा। इसके जरिये बर्थडे को कंटेनर टर्मिनल और मल्‍टी पर्पज कार्गो टर्मिनल में बदला जाएगा।
गौरतलब है कि गत सप्ताह भारत आईं अमेरिकी उप विदेश मंत्री (राजनीतिक मामले) वेंडी शरमन ने भारत और अन्‍य देशों से कहा था कि जब तक अमेरिका, तहरान के साथ परमाणु समझौते को अंतिम रूप नहीं दे देता, तब तक ईरान के साथ कारोबार करने की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।
क्यों है महत्वपूर्ण
छाबर बंदरगाह सिस्तान व बलूचिस्‍तान प्रांत में ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है। इसके विकास से भारत को पाकिस्तान को बाइपास कर अफगानिस्तान पहुंचने का समुद्री मार्ग उपलब्ध होगा। नई दिल्ली के लिए यह सामरिक दृष्टि से इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिये मध्य एशिया और खाड़ी देश पहुंचने में परिवहन लागत कम आएगी और समय की भी बचत होगी। इस पोर्ट के जरिये क्रूड ऑयल और यूरिया का आयात किया जाएगा, जिससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्‍ट और समय दोनों की बचत होगी।

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