गाजियाबाद में खुल सकता है डीजीसीईआई का जोनल आॅफिस

Image result for डीजीसीईआईगाजियाबाद। जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) जुलाई से लागू हो रहा है। इसके लिए उन सभी विभागों को तकनीकी रूप से तैयार किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर टैक्स से संबंधित हैं। सबसे अहम भूमिका डायरेक्टरेट जनरल आॅफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) की होगी, क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स भरने से लेकर रिफंड तक का काम सबकुछ आॅनलाइन हो जाएगा। ऐसे में सरकार मान रही है कि आॅनलाइन टैक्स चोरी हो सकती है, जिसके लिए डीजीसीईआई को और अधिकार देने की जरूरत है। इसी कड़ी में सरकार वेस्ट यूपी व उत्तराखंड में डीजीसीईआई का नया जोनल आॅफिस खोलने की तैयारी में है। जोनल आॅफिस खुलने का सबसे बड़ा फायदा एक्शन लेने के स्तर पर आएगा। अब तक यह क्षेत्र लखनऊ जोनल के अंदर आता है, जहां पर कमिश्नर स्तर के अधिकारी बैठते हैं।  डीजीसीईआई की मेरठ व देहरादून यूनिट को कोई भी छापा मारना हो तो पहले लखनऊ से स्वीकृति लेनी पड़ती है।कई बार जब तक कार्रवाई की स्वीकृति मिलती है तब तक स्थिति बदल गई होती है। डीजीसीईआई एक खुफिया यूनिट के तौर पर काम करती है, इसलिए गोपनीय सूचना मिलने पर उससे तत्काल एक्शन लेने की जरूरत होती है। गाजियाबाद या नोएडा में होगा जोनल आॅफिस डीजीसीईआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पहले जोनल आॅफिस मेरठ में खोले जाने की तैयारी थी, लेकिन अब आॅफिस गाजियाबाद व नोएडा में से किसी एक जगह पर होगा। जहां पर कार्यालय के लिए तलाश शुरू कर दी गई है। यहां पर जोनल आॅफिस खोलने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इन्हीं दोनों शहरों में सबसे ज्यादा बिजनेस सेंटर एवं कंपनियों के हेड आॅफिस हैं। यहां पर दफ्तर खुलने के बाद कमिश्नर रैंक के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) की तैनाती होगी, जिनसे स्वीकृति लेने में मेरठ व देहरादून की रीजनल यूनिट का ज्यादा वक्त नहीं लेगा। 200 करोड़ से अधिक का खुलासा दो साल पहले मेरठ में बनाई गई रीजनल यूनिट अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी पकड़ चुकी है जिसमें से करीब 110 करोड़ की चोरी अकेले गाजियाबाद व नोएडा क्षेत्र से पकड़ी है। ऐसे में गाजियाबाद व नोएडा में जोनल आॅफिस खोले जाने का दावा कहीं अधिक मजबूत है।

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