केरल सोने की तस्करी मामला: आरोपी स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका खारिज

केरल सोने की तस्करी मामले में एक आरोपी स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका कोच्चि के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (आर्थिक अपराध)  की अदालत ने खारिज कर दी है।

बता दें कि स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका को लेकर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (आर्थिक अपराध) ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पिछले हफ्ते अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। स्वप्ना ने अदालत को बताया था कि वह निर्दोष है और यह मामला केंद्र और राज्य सरकार की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का नतीजा है।
इससे पहले एनआईए की विशेष अदालत ने भी स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी थी। अदालत ने एनआईए द्वारा पेश किए गए सबूतों पर गौर करते हुए स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
गौरतलब है कि, पिछले साल नवंबर से राजनयिक चैनल के माध्यम से 100 करोड़ रुपये से अधिक की सोने की तस्करी में महिला की कथित भूमिका को लेकर जांच एजेंसी ने ये सबूत जुटाए थे। एनआईए ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामले में गहन जांच की जरूरत है। एनआईए ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह सबूत हैं कि आरोपी ने जानबूझकर ऐसा कृत्य किया जो सीधे तौर पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धारा 15 का उल्लंघन है।

स्वप्ना सुरेश ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उसे बिना किसी आधार के सिर्फ कल्पना के सहारे इस अपराध में फंसाया गया है और और यह मामला राज्य तथा केंद्र सरकारों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का है, जिसे मीडिया ने तूल दिया।

क्या है केरल में सोने की तस्करी का मामला
यह पूरा मामला केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में यूएई के पता वाले डिप्लोमैटिक कार्गो से 30 किलो सोना चुराने का है। दावा किया गया था कि कार्गो के संबंध में स्वप्ना सुरेश ने एयरपोर्ट के अधिकारी से संपर्क साधा था। यूएई वाणिज्य दूतावास जनरल ऑफिस के उच्च कूटनीतिज्ञ राशिद खामिस अल शामली के कहने पर कथित तौर पर संपर्क किया गया था। तस्करी किए गए सोने की कीमत 15 करोड़ रुपये बताई गई है।

स्वप्ना सुरेश (फाइल फोटो)

ये सोना उस कार्गो में छिपाया गया था जिसमें बिस्किट, नूडल्स, बाथरूम का सामान रखा जाता था, लेकिन कस्टम को तस्करी को लेकर पहले से सूचना मिल चुकी थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने स्वप्ना सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर को इस मामले में आरोपी बनाया है। तीनों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

 

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