काजू इम्पोर्ट को लेकर गुस्से में क्यों हैं व्यापारी

नई दिल्ली ; इंडिया की काजू इंडस्ट्री को इस साल काफी मुश्किल होगी। कच्चे काजू का इंपोर्ट महंगा हुआ है और वर्कर्स की सैलरी बढ़ने से काजू इंडस्ट्री की प्रॉफिटेबिलिटी पर बुरा असर पड़ रहा है। एक्सपोर्ट इनसेंटिव वापस लिए जाने और करेंसी में उतार-चढ़ाव से एक्सपोर्टर्स नाराज हैं। एक्सपोर्टर्स को इस चुनौती का सामना ऐसे वक्त में करना पड़ रहा है, जब शिपमेंट्स 2014-15 में 5,545 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई। भारत में हर साल 15-16 लाख टन काजू की मांग रहती है। इसमें से आधे से ज्यादा का प्रोसेसिंग के लिए इंपोर्ट किया जाता है। देश को अभी कच्चे काजू की अफ्रीका से खरीदारी में वियतनाम से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। वेस्टर्न इंडिया कैश्यू कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हरि कृष्णन आर नायर के मुताबिक, ‘वियतनाम अफ्रीका से कच्चे काजू के इंपोर्ट के लिए 40-50 डॉलर प्रति टन ज्यादा दाम दे रहा है।’
सस्ते श्रम और कम खपत के चलते वियतनाम ज्यादातर काजू का एक्सपोर्ट करता है। कच्चे काजू की कीमत बढ़कर 1,400 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है, क्योंकि पूरी दुनिया में इसकी मांग बढ़ी है। 2014-15 में इंडिया ने 1,34,322 टन काजू गिरी का एक्सपोर्ट किया। इस पर 5,545 करोड़ रुपये का खर्च आया। क्वांटिटी के लिहाज से यह इससे पिछले साल से 17 फीसदी और वैल्यू के लिहाज से 10 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल काजू की एक्सपोर्ट की वैल्यू में इजाफा हुआ क्योंकि वॉल्यूम में भी बढ़ोतरी हुई थी।
हालांकि, इंडिया पिछले कई सालों से काजू का नेट इंपोर्टर बना हुआ है क्योंकि देश में प्रोसेसिंग के लिए कच्चे काजू की मांग बढ़ रही है। इंडिया ने 2014-15 में 9,30,458 टन रॉ काजू का इंपोर्ट किया, जिसकी वैल्यू 6,601 करोड़ रुपये रही है। कालबावी कैश्यूज के मैनेजिंग पार्टनर के प्रकाश राव के मुताबिक, ‘काजू प्रोसेसिंग का काम पहले दक्षिण भारतीय राज्यों और गोवा तक ही सीमित था, अब पूरे देश में फैल गया है। इससे कच्चे काजू की मांग बढ़ी है। डोमेस्टिक काजू प्रॉडक्शन में भी खास सुधार नहीं हो रहा है। ऐसे में देश को ज्यादा कच्चे काजू का आयात करना पड़ रहा है।’ हालांकि, डायरेक्टरेट ऑफ कैश्यूनट एंड कोको डिवेलपमेंट ने देश में काजू उत्पादन के 5 फीसदी बढ़कर 7,73,490 टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है, लेकिन एक्सपोर्टर्स का कहना है कि सप्लाई बता रही है कि देश में काजू का प्रॉडक्शन अनुमान से कम है। वहीं, रुपये के कमजोर होने से कच्चे काजू का इंपोर्ट महंगा हुआ है। इसके साथ देश में काजू की खपत बढ़ रही है।
स्रोत : ET

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