कस्‍टम डिपार्टमेंट में एक्सपोर्टरों के अटके 6400 करोड़

नई दिल्‍ली:  कस्‍टम डिपार्टमेंट में ड्यूटी रिफंड की सुस्‍त प्रक्रिया ने निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निर्यातकों से जुड़ी संस्‍था फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्‍सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के मुताबिक भारतीय निर्यातकों के पिछले ढाई महीने में 6423 करोड़ के ड्यूटी रिफंड अटक गए हैं।
फियो के अध्‍यक्ष एससी रल्‍हन के मुताबिक सरकार निर्यातकों की मदद करने की बजाए निर्यात के लक्ष्‍य का लक्ष्‍य पूरा करने के लिए तत्‍पर है। लेकिन निर्यातकों की समस्‍या हल किए बगैर यह लक्ष्‍य हासिल करना असंभव है। रल्‍हन के अनुसार हालात जल्‍द नहीं सुधरे तो पिछले साल की तरह इस साल भी भारत निर्यात के लक्ष्‍य से चूक सकता है।
रिफंड अटकने से बढ़ी पैसे की किल्‍लत
लुधियाना के एक्‍सपोर्टर दिलशान चौधरी के मुताबिक निर्यातक उत्‍पादन प्रक्रिया के लिए जो कच्‍चा माल विदेश से आयात करता है, उस पर उसे ड्यूटी रिफंड हासिल होता है। लेकिन कभी ड्यूट ड्रॉबैक, कभी रिफंड और कभी सैनवेट रिफंड में महीनों तक करोड़ों रुपये अटकने के चलते मैन्‍युफैक्‍चरर्स के सामने पूंजी की समस्‍या खड़ी हो गई है। ऑर्डर पहले से कम हैं, ऊपर से पैसा नहीं मिला तो एक्‍सपोर्टर्स के लिए सैलरी देना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में यदि रिफंड की रफ्तार नहीं बढ़ी तो इसका असर जल्‍द ही निर्यात के आंकड़ों पर भी पड़ सकता है।
लक्ष्‍य से पिछड़ सकता है निर्यात
फियो के मुताबिक फिलहाल भारतीय निर्यात की हालत ठीक नहीं है। पिछले साल निर्यात का लक्ष्‍य पूरा नहीं हो सका। मौजूदा वित्‍त वर्ष में भी हालात वैसे ही हैं। निर्यातकों को सरकार से खास मदद नहीं मिल रही है। पोर्ट पर कंटेनर की किल्‍लत और निर्यात ऑर्डर में सुस्‍ती के चलते इस साल निर्यात में और भी ज्‍यादा गिरावट की संभावना दिखाई दे रही है। फियो के मुताबिक पिछला साल निर्यात की दृष्टि से पिछले 6 साल में सबसे निराशाजनक रहा। करीब 21 फीसदी की जोरदार गिरावट के साथ भारतीय निर्यात निगेटिव जोन में पहुंच गया है। 340 अरब डॉलर के लक्ष्‍य के मुकाबले भारतीय निर्यात मात्र 310.5 अरब डॉलर रहा।
चीन और बांग्‍लादेश के मुकाबले कम मिल रही हैं रियायतें
फियो के मुताबिक चीन और बांग्‍लादेश से तुलना भारतीय निर्यातकों को कुल निर्यात का 1 फीसदी से कम हिस्‍सा प्रोत्‍साहन के रूप हासिल होता है। 2014-15 के दौरान भारत से कुल 18,97,026 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। जबकि इसके मुकाबले विशेष कृषि और ग्राम उद्योग भवन, फोकस मार्केट और प्रॉडक्‍ट स्‍कीम, इंटरेस्‍ट सब्सिडी और मार्केट डवलपमेंट असिस्‍टेंस जैसी योजनाओं के तहत निर्यातकों को महज 17,995.81 करोड़ रुपये प्रोत्‍साहन के रूप में मिले। जो कि दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम है।
 स्रोत : दैनिक भास्कर

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