कस्टम अफसरों पर सीबीआई का छापा 106 करोड़ का ड्यूटी ड्रा-बैक घोटाला

इंदौर भोपाल। आयात-निर्यात के कारोबार में निजी कंपनियों से सांठगांठ कर सरकार को 106 करोड़ रुपए की चपत लगाने के मामले में सीबीआई ने कस्टम अफसर एवं कारोबारियों के घरों पर छापामार कार्रवाई की है। यह घोटाला, पीथमपुर (इंदौर) स्थित धन्नाड़ आईसीडी का है जिसमें 7 कस्टम अफसरों की मिलीभगत सामने आई है। इनमें से 3 रिटायर हो चुके हैं। इंदौर, मुंबई एवं चेन्नई स्थित 11 ठिकानों पर छानबीन में बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त हुए हैं। जिन 12 कंटेनरों में विदेशों से आई सामग्री को अंडर वैल्यू बताया गया था उसमें प्रतिबंधित सेक्स टॉयज और महिलाओं के अंर्तवस्त्र भी थे। सीबीआई एसपी हरिसिंह ने बताया कि सीबीआई की छापामार टीम ने इंदौर में 8 स्थानों कार्रवाई की, चेन्नई में एक एवं मुंबई में दो ठिकानों पर छानबीन की गई। यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2011-12 के दौरान हुआ।  सीबीआई के पहले डीआरआई भी यहां छापामार कर दस्तावेज जब्त कर चुकी है। सीबीआई ने 29 मार्च को मामले में दो प्रकरण दर्ज छानबीन शुरू की है। घोटाले में फर्जी कंपनियों के नाम पर कागजों में आयात एवं निर्यात दिखाकर कस्टम सेंट्रल एक्साइज विभाग से 106 करोड़ रुपए की डूटी ड्राबैक हासिल कर ली गई। आयात-निर्यात के सामान की कीमतें पांच गुना तक बड़ा कर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया, इस गोरखधंधे में कस्टम अफसर, एजेंट्स एवं कारोबारियों की भूमिका सामने आई है। कस्टम में डिप्टी कमिश्नर रहे एके शुक्ला पर मेसर्स श्रेया इंटरनेशनल एवं अंजनी इंटरनेशनल के साथ सांठगाठ करने का आरोप है। शुक्ला अब रिटायर हो चुके हैं, उनके अलावा विनायक जोशी, केबी पाटिल, मोहम्मद नौशाद, गिरीश काले एवं जीआर मालवीय का नाम भी सामने आया है। मुंबई के किरीट श्रीमंकर एवं एक एजेंट अंकित मेहता के घर पर भी सीबीआई ने छापामार कार्रवाई की है। इनके यहां मामले से जुड़े कुछ दस्तावेज जब्त किए गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार तत्कालीन कमिश्नर जयप्रकाश सिंह भी डीआरआई और सीबीआई की जांच के घेर में आए थे। तब सिंह इंदौर में ही पदस्थ थे। इसी दौरान उनकी पत्नी संध्या सिंह की मुंबई में अपहरण के बाद नृशंस हत्या कर दी गई थी।

सीबीआई छापे के पहले गायब हो गए
इंदौर : 7 अप्रैल को सीबीआई ने कस्टम के अधिकारियों के यहां छापे की कार्रवाई जरूर की है, लेकिन मुख्य सरगना सीबीआई की पहुंच से काफी दूर है। इस कार्रवाई में आईआरएस एस. चटराज फिलहाल गायब है। इनके खिलाफ अभी तक सीबीआई कुछ विशेष नहीं जुटा पाई है। इसके अलावा मनजीत सिंह और किरिट भाई मंकर को भी पहले ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से राहत मिल चुकी है। डीआरआई ने कंटेनरों के आयात-निर्यात मामले का खुलासा करते हुए तकरीबन 100 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का खुलासा किया था। इस मामले में दो आईआरएस, चार अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके पश्चात इन अधिकारियों को सस्पेंड भी कर दिया गया था। आठ ठिकानों पर सीबीआई ने मारे छापे, 100 करोड़ का आयात-निर्यात घोटाला किरिट भाई मंकर और मनजीतसिंह ने इंदौर आईसीडी से 18 कंपनियों के माध्यम से दर्जनों कंटेनर आयात-निर्यात किए थे। इस दौरान जो भी अधिकारी यहां पदस्थ रहे उन सभी के खिलाफ डीआरआई ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किए थे। सभी अधिकारियों ने इस तरह के शो-कॉज नोटिस का जवाब भी फाइल कर दिया। इसके बावजूद डीआरआई ने सीबीआई को जांच के लिए मामला भेज दिया। सीबीआई ने मुंबई और चेन्नई में भी छापे की कार्रवाई की थी। इस दौरान दस्तावेज तो जब्त कर लिए गए है, लेकिन एस. चटराज इस कार्रवाई के दौरान उपस्थित नहीं थे। विभागीय सूत्रों की माने तो चटराज फिलहाल अंडरग्राउंड हो चुके हैं। सीबीआई के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि नोटिस जारी करने के साथ ही उन्हें मौका दिया जाएगा कि वो अपना पक्ष रखने हाजिर हो। यदि वे हाजिर नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

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