कम वेल्यूएशन तथा सस्ती रिश्वत के चलते आईसीडी तुगलकाबाद तथा अन्य पोटो से काम मुंदरा शिफ्ट हुआ

डीआरआई भी अब रिश्वत के खेल में अछूती नहीं रही
नई दिल्ली : डीआरआई एक ऐसा नाम स्मगलरों में दहशत पैदा कर दे। एक समय ऐसा था जब गलत काम करने वालों के यहां डीआरआई पहुंच जाती थी और आगे पीछे के सभी खाते खंगाले जाते थे। करोड़ों रुपये जमा होते थे। तब जाकर जान छूटती थी, रिश्वत की बात करना भी पाप था। मगर आज की डीआरआई वह नहीं रही। डीआरआई में कुछ भ्रष्ट अफसरों के कारण आज मार्किट में डीआरआई भी एक ऐसा नाम हो चुका है जिसको ले-देकर मैंनेज किया जा सकता है। प्याज काटो तो यह हो नहीं सकता की उसकी गंद न आये। आज डीआरआई में भी रिश्वत का खेल कुछ भ्रष्ट अफसर जम कर खेल रहे है। कुछ भ्रष्ट अफसरों के कारण डीआरआई बदनाम हो रही है। डीआरआई में ईमानदारी का चोला ओढ़ कर स्मगलरों से जम कर रिश्वत ली जा रही है। सीएचए तथा दलाल टाईप वकीलों के द्वारा।
सूत्रों के अनुसार छापे डाले जाते है कुछ को पकड़ा जाता है कुछ को ले देकर छोड़ दिया जाता है। आज एयर कार्गो इम्पोर्ट शेड में स्मगलिंग का धंधा जोरों पर है। कुछ स्मगनर टाईप लोग पेपर फाईल करने के आधे घंटे के अंदर अपना माल बाहर कर लेते है गेट पास तक सब तैयार रहता है। अफसर भी इनके पेपर फाईल करने का इंतजार करते रहते है। क्योंकि रिश्वत का मोटा खेल होता है। सूत्र बताते है कि डीआरआई के पास इसकी सूचना लम्बे समय से है मगर आंखे बंद कर रखी है। अभी हाल ही में डीआरआई ने कुछ माल रोका है। सूत्र बताते है कि मिस- डिक्लरेशन करके माल निकाला जा रहा था, अभी जांच जारी है। इसी तरह कस्टम सिटी प्रिवेंटीव ने भी महीना बांध रखा है और पूरी सूचना होने के बावजूद भी इन स्मगलरों का माल नहीं रोका जाता। आज रिश्वतखोरी की वजह से सही काम करने वाले परेशान हो रहे है और स्मगलर मौज उड़़ा रहे है।
रेवेन्यू न्यूज़ के पास कुछ पुख्ता सबूत है कि गलत काम करने वाले आर.एम.एस. में मिस-डिक्लरेशन करके आधे धंटे में माल निकाल लेते है और जांच एजेंसियां देखती रह जाती है यह काम लम्बे समय से चल रहा है। रामचंद्र कह गये सिया से ऐसा कलयुग आयेगा। हंस चुगेगा दाना तिनका कौआ मोती खायेगा।।

मुंदरा तथा कोलकत्ता पोर्ट पर अंडर वेल्यूएशन तथा मिस-डिक्लरेशन का धंधा जोरों पर
नई दिल्ली : आज दिल्ली तथा दिल्ली के आस-पास के पोटा पर काम करने वाले क्लीरिंग एजेंटों में भारी निराशा है। कारण है मुंदरा पोर्ट जहां पर कम रेटों पर कई तरह के कंज्यूमर गुड्स निकाले जा रहे है। सूत्र बताते है कि एक-एक कंटेनर में दिल्ली के रेटों में 4 से 5 लाख रुपये का ड्यूटी का फर्क है तथा पर कंटेनर दिल्ली से रिश्वत भी सस्ती है। दूसरी बात मिस-डिक्लरेशन का धंधा भी जोरों पर है। सूत्र बताते है कि इसके चलते न्हावा शेवा मुम्बई से भी कुछ काम मुंदरा शिफ्ट हुआ है।
खास तौर पर आईसीडी तुगलकाबाद का लगभग काम मुंदरा शिफ्ट हो गया है। हम बहुत पहले से लिखते आ रहे है कि एक ही देश में एक ही माल अलग-अलग रेटों पर क्लीयर क्यों होता है। कंप्यूटर सिस्टम होने के बावजूद भी यह प्रॉबलम क्यों? एक ही डिपार्टमेंट एक ही चेयरमैंन मगर पोर्ट पर वेल्यूऐशन अलग-अलग क्यों? क्या किस खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है? इसी तरह कोलकत्ता में भी दिल्ली से कम वेल्यू पर काम होता है। सरकार की यह डबल गेम क्यों? डीआरआई भी सो रही है डीआरआई क्यों नहीं मुंदरा तथा कोलकत्ता पर नजर डाल रही करोड़ों अरबों का खेल जब हो चुका होगा तब डीआरआई नींद से जागेगी।

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