एसजीएसटी तथा सीजीएसटी चोरी एक आसान तरीका है करोड़पति बनने का

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धर्मवीर आनंद
नई दिल्ली : एक जेब कतरा किसी की जेब काट ले एक चैन स्नेचर किसी की चैन खींच ले तो एसएचओ की नौकरी चली जाती है जबकि इन छोटी चोरी में मुश्किल से 5 से 10 हजार तक ही चोरों के हाथ में आते है। मोटरसाईकिल चोरों तथा गाड़ी चोरों को बहुत बड़ा चोर समझा जाता है। पुलिस मारती भी बहुत है पुलिस वाले इन चोरों के साथ अपनी फोटो खिंचकर अखबारों में लगवाते है। लेकिन करोड़ों की टैक्स चोरी करने वालों को दंड़ित करने का तरिका ही बड़ा अलग होता है। उनको प्यार से समन भेजा जाता है।
वह अपने पूरे इंतजाम के साथ उसका जवाब देने जाते है वकील के हाथ चिट्ठी भेज दिया जाता है कि इस तारीख पर नहीं आ सकता दूसरी तारीख दे दो फिर वह जाता है। सरकारी दफ्तर में जाते ही अफसर उनको चाय पिलाते है। पहले ही किसी का फोन आ गया होता है आराम से बातचीत होती है। जिसको कहते है स्टेटमेंट मतलब 100 करोड़ की चोरी करने वालों को देखों कोई टेंशन नहीं होती क्योंकि वह व्यापारी है। इसी तरह का बर्ताव सोना स्मगलरों के साथ किया जाता है। प्रेस रिलीज में ना अपराधी की फोटो होती है ना उनके नाम दिये जाते है बस इतने किलो सोना पकड़ा गया ताकि उनकी इज्जत बनी रहे। जीएसटी टैक्स की चोरी में भी यही होता है ना कंपनी बताई जाती है ना चोरी करने वालों के नाम 100 करोड़ की चोरी पकड़ी गई।
कितना फर्क है चोरी-चोरी में। जबसे जीएसटी आया है कितने लोगों के घर में खुशियां आ गई है। पूरे देश में जमकर टैक्स चोरी हो रही है कोई नहीं डर रहा सरकार भी खुश है खजाने में माल आ रहा है। मगर सरकार यह नहीं सोच रही की नकली कंपनिया खोलकर फर्जी बिल बनाकर जो लोग करोड़ों की चोरी कर रहे है वह टैक्स देने वालों का कितना नुकसान कर रहे है। छापामार डिपार्टमेंट छापेमारी तो कर रहे है मगर वही होता है ले देकर छूट जाता है आरोपी। एसजीएसटी तथा सीजीएसटी में भ्रष्ट अफसरों की मौज हो रही है।
अभी-अभी दिल्ली में एक एसजीएसटी कमिश्नर को को रिश्वत लेते पकड़ा गया यह उदहारण है। हर महीने पूरे देश में करोड़ो-अरबों की टैक्स चोरी के केस बन रहे है मगर कितने से वसूली होती है सी.ए उलझा देते है अफसरों को। अफसरों को भी अभी पूरी नॉलेज नहीं है जीएसटी की वह भी ले देकर मामले को ठंण्डे बस्ते में डाल रहे है।
क्योकि उन्हें भी पता है कई साल केस चलेगा फिर ठंण्डे बस्ते में चला जाएगा। (अंधी पीस रही है कुत्ते खा रहे है) यह हाल है सरकार का। सरकार समझती है जीएसटी लगाकर बहुत बड़ा तीर मार दिया है। आज पूरे देश में आपकी मर्जी है बिल लो नहीं लो कोई नहीं पूछता। सी.ए तथा अफसरों की मौज है हर व्यापारी का रिमोट इनके हाथ में है। इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट में सीएचए और जीएसटी में सी.ए दोनों के हाथ होती है अफसरों की कमान।
टैक्स चोरी के बंदरबाट में यही दोनों करोड़पति हो रहे है। पहले चोरी सिखाते है फिर बचने का तरीका भी बताते है इसी में यह अपना खेल कर जाते है। बाकी का काम जीएसटी का आॅडिट विभाग पूरा कर देता है जब यह फैक्ट्रीयों आॅडिट करने जाते है तो कई दिन तक आॅडिट चलता है। इसी दौरान उनके सारे खाते ठीक करवा दिए जाते है और मोटी रकम ले ली जाती है। एंटीविजन से ज्यादा कमाई आॅडिट में है बिना किसी खतरे के।
आॅडिट में बहुत सारे अफसर है जो लगातार आॅडिट में रहकर रिश्वत की मलाई खाते है। मोदी जी जितना सख्ती करते जा रहे है अफसर और व्यापारी और भी फ्रेंडली होते जा रहे है और बदनाम हो रहे है हमारे वित्त मंत्री तथा रेवेन्यू सैक्रेटरी अधिया जी चोरी करने वाले तथा भ्रष्ट अफसर बहुत खुश है।
पैसा आने की खुशी में काले अफसरों को गोरा होता देखता हूं तो सोचता हूं कि पैसा आने से दो नंबर के लोग भी गोरे और स्मार्ट हो जाते है कितनी खुशी छिपी है इस दो नम्बरी पैसे में।

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