एसजीएसटी, आईजीएसटी तथा सीजीएसटी की चोरी का खेल जोरों पर कसूरवार कौन पब्लिक या सरकार?

Image result for gstआज पूरे देश में जीएसटी चोरी की खबरे आ रही है। फर्जी बिलिंग नकली ई-वे बिल और भी कई तरह के जीएसटी के फ्रॉड सामने आ रहे है गिरफ्तारी भी चल रही है। मगर खास बात यह है की अफसरों की भारी चांदी हो रही है भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है इस सारे खेल के पीछे क्या है? सरकार की पॉलिसी या सरकार चाहती है की ऐसा हो भिन्न-भिन्न राज्यों से रोज बड़ी-बड़ी जीएसटी चोरी की खबरे आ रही है। 150 करोड़, 200 करोड़, 500 करोड़ की जीएसटी की चोरी पकड़ी गई यह केस तो वह है जिसकी प्रेस रिलिज डिपार्टमेंट अखबारों में देता है वाह-वाही लूटने के लिए मगर ऐसे बहुत सारे केस है जिसकी खबर तक नहीं लगती वैसे ही निपटा दिये जाते है। अगर मैं कई बातों को विस्तार से लिखूंगा तो कई सीजीएसटी के अफसरों की पतलून ढीली हो सकती है। जीएसटी चोरी करने वाले को तो पहले पकड़ा जाता है पूरी जांच की जाती है करोड़ों का घपला करने पर जांच पर जांच होती है इसी दौरान सारा मामला सेटल कर दिया जाता है केस पर मिट्टी डाल दी जाती है। आज हर भ्रष्ट अफसर सीजीएसटी में आना चाहता है वह भी छापामार दस्ते में क्योंकि जीएसटी के कानून में बहुत सारी खामियां है जिससे भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। किसी जीएसटी चोरी करने वाले से आप वसूली नहीं कर सकते क्योंकि जीएसटी का कानून ही इतना कमजोर है जिसका फायदा उठाया जा रहा है।
सरकारी अधिकारों का गलत इस्तेमाल हो रहा है जेबे भरने के लिए। जीएसटी तो अपने आप जमा हो जाता है तो अफसर क्या करते है दफ्तरों मे बैठकर केस बनाओ और सरकारी कागज और समय बर्बाद करके जेबे भर ली जाती है। मेरठ में डीजीजीएसआई का एक किस्सा नाम ना बताने की शर्त पर बताया गया की 500 करोड़ का फर्जी बिलिंग का केस पकड़ा गया था लोग गाजियाबाद के बताये जाते है मगर केस पर मिट्टी डाल दी जा रही है जो इस केस में पूरी तरह जानता है उसने बताया की केस को कैसे निपटाया जाता है।
इसी तरह के कुछ अफसर है जो डाटा दिखा कर डरा कर वसूली कर रहे है। यह लोग हमेशा से जहां भी रहते है एंटीविजन में ही रहते है नॉर्थ हो या वेस्ट एंटिविजन इस दा बेस्ट का फॉमूर्ला यह लोग लगा लेते है। मैं एक बात सोचता हूं की काली भेड़ों को कौन हरी-हरी घास चरने भेजता है क्या घूम फिर कर सिर्फ इन्ही लोगों को काम आता है बाकी सब निक्कमें है क्या? आज प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर सुनील कुमार साहनी तथा मैडम कृष्णा ए. मिश्रा जी पर कोई उंगली नहीं उठा सकता ईमानदारी तथा उनकी कार्यक्षमता पर मगर कुछ सियार रूप बदलकर ईमानदारी का चोगा पहन कर नीचे ही नीचे ताक लगा रहे है।
विस्तार से क्या लिखू खुद समझदार है। जल्दी कुछ नहीं किया तो दूसरी ऐजेंसियों के नेटवर्क में आ सकते है वह लोग। आज आईसीडी एक्सपोर्ट में अरबों रुपए का फर्जी एक्सपोर्ट हो रहा है जो माल पहले आता था अब वह जा रहा है। वेल्यूऐशन और आईजीएसटी के रिफंड के नकली खेल से सैकड़ों फर्जी एक्सपोर्टर करोड़पति बन रहे है। अफसरों की इतनी चांदी शायद ही कभी हुई हो। सरकार कितनी अंधी है देखा जा सकता है अफसरों के आंखों पर पट्टी है और हाथ बंधे हुए है वह भी देखा जा सकता है। पढ़े लिखे अफसर सारा खेल देख रहे है और खुद भी शामिल है। आंकड़ों का खेल अपने ऊपर के अफसरों को दिखा कर जेब भर रहे है। आंकड़ों को बड़े अफसरों को दिखा कर अवॉर्ड लेना चाहते है शर्म आनी चाहिए ऐसे अफसरों को
यह लोग उस माल को पकड़ने का आंकड़ें दिखा रहे है जो माल चला गया है और लोग अरबों रुपए ले चुके है उनके आंकड़े कौन बतायेगा, रिश्वत के आकड़े कौन बताऐगा, 10 लाख रुपए पर कंटेनर का खेल कौन बतायेगा? उन स्मगलरों को आईसीडी एक्सपोर्ट में देखा गया जो सालों पहले करोड़ो कमा चुके है अब फिर कुंभ के मेले मे आए है पैसे कमाने के लिए।
वैसा ही हाल आईसीडी एक्सपोर्ट शेड का है जैसा एयरपोर्ट पर होता कुछ प्रतिशत गोल्ड के केस पकड कर दिखा कर वाह-वाही लूटी जाती है मगर सर्राफा बाजार के सूत्रों के अनुसार दिल्ली में सैकड़ों किलो गोल्ड निकलता है एयरपोर्ट के जरिये। यह आंकड़ों के खेल में किसको बरगलाया जाता है कुछ पता नहीं। जो फर्जी माल आईसीडी में भेजा जा रहा है अगर उनकी जांच की जाये तो कोई नहीं खरीदेगा इन जांच करने वाले अफसरों को पता नहीं चलता क्या की यह सब फर्जी काम हो रहा है रिफंड के चक्कर में।
सरकार चुनाव के चक्कर में खुद लुटवा रही है देश को। पब्लिक का माल लूटों जिससे ब्लैक मनी में, मार्किट में, प्रॉपर्टी में तथा सोने के दामों में तेजी आये। विदेशो में पड़े पैसे तो नहीं ला सकते मगर और काला धन तो इकट्टा मत होने दो। यह माल जो एक्सपोर्ट हो रहा है अफसर अपने घर ले जाकर अपने घरवालों को दिखाये और बताये की इस रेट पर विदेश जा रहा है उनको भी शर्म आ जायेगी की कौन खरीदेगा इनके बैट, पर्स, गारमेंटस तथा और भी आईटमें जिनको कुड़ा बीनने वाला भी न उठाये वह विदेश में बिकेगा या फैकेंगे। एयर इम्पोर्ट कार्गो में ऐसे-ऐसे खेल होते है कि पैरों तले जमीन खिसक जाये बड़े अफसरों तक को यह बात पता नहीं चलती। उधर प्रयागराज में कुभ लगा है और इधर सीजीएसटी और आईजीएसटी चोरी का मेला लगा हुआ है। फर्जी कंपनियां जिसकी औकात 10 लाख की नहीं है वह सैकड़ों करोड़ रुपए का टर्न ओवर दिखा रहे है सिर्फ कागजों में। किसी ने सही कहा था की फाईनेंस मिनिस्टर वकील को बनाकर मोदी जी ने बहुत गलत किया है। फाईनेंस मिनिस्टर भी किसी अर्थशास्त्री को बनाया होता तो आज जीएसटी कब का कामयाब हो चुका होता यू दर-दर की ठोकरे न खा रहा होता।

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