एक योगी की जरूरत है कस्टम डिपार्टमेंट को

(क्या बनू दुनियां दा सच्चे बादशाह वाहे गुरू जाने)
हमारी अखबार 16 पेज की है अगर हम चाहें तो 32 पेज भी कर सकते है स्मगलिंग तथा भ्रष्टाचार की खबरों से। आज देश में चारों ओर स्मगलिंग ही स्मगलिंग हो रही है। यह जो खबरें हम लिख रहे है यह 1 प्रतिशत भी नहीं हैै। जो अखबार में प्रेस रिलिज द्वारा आई है अगर हम इन से अलग हट के छापे तो वह खबरें न तो स्मगलर पचा पायेंगे न ही अफसर। इसी तरह चलना हमारी मजबूरी है। खबर आई है कि बैंक आॅफ बड़ौदा के हवाला रैकेट में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। यह अरबोंपति कैसे बने एक लंबी हिस्ट्री है। इसी तरह के कई सफेदपोश स्मगलर अभी भी शिकंजे से बाहर है कारण है कि सरकारी अफसर जो करोड़ों लेकर इन लोगों को सरकारी शिकंजे से बाहर रखते है।
आज इन भ्रष्ट अफसरों की वजह से अरबों-खरबों रुपए का रेवेन्यू भी सरकारी खजाने में नहीं आ पाता या तो सरकार चाहती है कि यह सब चोरी हो। अगर सरकार चाहती है कि सरकारी खजानों पर डाका न पड़े तो इन भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं? मैं बार-बार लिखता हंू कि बेनामी तथा फर्जी कंपनियों पर अंकुश लगाया जाये।
हर रोज ऐसे कितने केस सामने आ जाते है कि जिसमें 20-30 हजार पर कंटेनर लेकर अपनी कंपनी का इस्तेमाल करने वाले पकड़े जाते है।
असली स्मगलर जिस का इस माल पर पैसा लगा होता है वह बच जाता है। अगर स्मगलरों का पूरा सोना पकड़ा जाता तो आज किसी की हिम्मत नहीं होती कि लोग गोल्ड की स्मगलिंग करे। सूत्रों कि माने तो 1 प्रतिशत ही सोना सरकार द्वारा पकड़ा जाता है बाकी सब मिलीभगत या चोरी द्वारा आ जाता है। मुंबई, कोलकत्ता, चैन्नई पोर्ट यहां आज भी स्मगलिंग का खुला खेल हो रहा है। कारण भ्रष्ट क्लीयरिंग एजेंट तथा भ्रष्ट अफसर इन्हीं के द्वारा इर्म्पोटरों को स्मगलर बनाया जाता है।

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