एक्साइज विभाग के अधिकारियों को फटकार

नई दिल्ली : नियम-कानून को ताक पर रखकर मेक माई ट्रिप डॉट कॉम के उपाध्यक्ष एमके पिल्लई को गिरफ्तार करने पर हाई कार्ट ने एक्साइज विभाग के अध्किारियों को कड़ी फटकार लगाई है।न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और विभू बखरू की खंडपीठ ने अधिकरियों से पूछा कि बिना कारण बताओ नोटिस भेजे आप किसी को कैसे गिरफ्तार कर सकते है। कितने मामलों में आप बड़े डिफाल्टर को आप इस तरह गिरफ्तार कर चुके है। किसी व्यक्ति का बिना लिखित में जानकारी दिए उसे गिरफ्तार करने का समर्थन नहीं किया जा सकता है। एक्साइज विभाग ने कंपनी पर 67.44 करोड़ रूपये सर्विस टैक्स चोरी का मामला दर्ज किया था।
खंड़पीठ ने कंपनी के अधिकरियों को हलफनामा दायर उन अधिकरियों के नाम बताने को कहा है जो पिल्लई को गिरफ्तार करने की कार्रवाई में शामिल थे उनके बारे में भी जानकारी देने को कहा है, जिन्होने कंपनी पर सर्विस टैक्स जमा कराने का दबाव बनाया था। खंडपीठ ने इस संबंध में 10 मार्च तक जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद 21 मार्च तक एक्साइज विभाग के संबंधित अधिकारी कंपनी के हलफनाम के आधार पर अपना जवाब दाखिल करेगे। दोनों पक्षों से जवाब मिलने के बाद अदालत सुनवाई करेगी। खंडपीठ ने कहा की सर्विस टैक्स नहीं देने पर किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी फाइनेंस एक्ट के तहत तय नियमों के मुताबिक ही होनी चाहिए।
विभाग को जिममेदारी से काम करना चाहिए। इस बात का पता लगाना चाहिए था कि डिफाल्टर जान-बूझकर सर्विस टैक्स देने से बच रहा है या नहीं। एक्साइज विभाग का कहना था कि कंपनी ने लोगों से सर्विस टैक्स तो वसूला है, लेकिन विभाग को 67.44 करोड़ रूपये का सर्विस टैक्स नही चुकाया।
विभाग ने कंपनी के उपाध्यक्ष एमके पिल्लई को गिरफ्तार किया था कंपनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने कहा की वह एक ऐजेंट के तौर पर काम करती है। ऐसे में ग्राहक द्वारा फ्लाइट की बुकिंग व होटल में रहने पर सर्विस टैक्स वह नहीं दे सकती है। होटल मालिक व हवाई जहाज कंपनी से इसका सर्विस टैक्स मांगा जाना चाहिए।
कार्रवाई को सही ठहराते हुए एक्साइज विभाग ने कहा था कि मामले की जांच चल रही है। जांच अधिकारी को यह विशेषाधिकार है कि वह आरोपी को गिरफ्तार करने का निर्णय ले सके। अदालत ने 20 जनवरी को कंपनी के खिलाफ कठोर कदम उठाने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
सौजन्य से- दैनिक जागरण

Leave a Reply

*

You are Visitor Number:- web site traffic statistics