एक्साइज, कस्टम और सर्विस टैक्स के मामलों की सुनवाई अब इंदौर में होगी

नई दिल्ली : वित्तमंत्री अरुण जेटली का बजट प्रस्ताव शहर और प्रदेश को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित करता नजर आ रहा है। कस्टम, एक्साइज और सर्विस टैक्स प्रकरणों में परेशानी झेल रहे उद्योगपतियों को अब दिल्ली के चक्कर नहीं काटना होंगे। फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति, रोड-रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में दो लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश, इन सभी का फायदा सीधे-सीधे इंदौर और प्रदेश को मिलता नजर आ रहा है।
कस्टम, एक्साइज एंड सर्विस टैक्स एपीलेट ट्रिब्यूनल (सेसटेट) इन केंद्रीय करों, डूटी से जुड़े विवादों और प्रकरणों की सुनवाई करता है। सीए सुनील खंडेलवाल के मुताबिक देश के 11 शहरों में से स्टेट की बेंच खोलने की घोषणा बजट में की गई है। इन शहरों की सूची में इंदौर और जबलपुर का भी नाम है। कस्टम, एक्साइज, सर्विस टैक्स मामले में विभाग की कार्रवाई के खिलाफ उद्योगपतियों को ट्रिब्यूनल में अपील का अधिकार मिला है। अब तक शहर और प्रदेश के उद्योगपतियों को अपील करने से लेकर न्याय पाने तक के लिए दिल्ली जाना होता था।
सीए खंडेलवाल के अनुसार ट्रिब्यूनल बेंच की स्थापना में इंदौर को प्राथमिकता मिलेगी क्योंकि प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर ही है। एआईएमपी के प्रतिनिधि इस बारे में स्थानीय सांसद और लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर ट्रिब्यूनल की स्थापना पहले इंदौर में करने की मांग रख सकते हैं। प्रदेश और शहर में ट्रिब्यूनल नहीं होने से उद्योगपतियों को प्रकरणों के निपटारे के लिए समय और पैसा दोनों ज्यादा खर्च करना पड़ता था। दिल्ली में न केवल ट्रिब्यूनल तक चक्कर लगाने होते हैं बल्कि महंगे वकीलों की सेवाएं भी लेनी पड़ती हैं।
सौजन्य से- नई दुनिया

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