एक्सपोर्टरों को जल्द ही सिंगल विंडो के तहत लाया जाएगा – सीबीईसी

नई दिल्ली- लगातार गिरते एक्सपोर्ट के बीच सरकार निर्यातकों की हौसला अफजाई में लगी है। रिफंड क्लीयरेंस में तेजी और बिजनेस प्रोसेस को आसान बनाने के कई नए उपाय किये जा रहे हैं।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम ने वित्त वर्ष 2015-16 में सबसे ज्यादा ड्यूटी ड्रॉ-बैक जारी किये हैं और इस साल भी वह निर्यातकों का कोई रिफंड पेंडिंग नहीं रखने के लक्ष्य के साथ काम कर रहा है। हाल में इंपोट्‍​र्स के लिए शुरु किये गये सिंगल विंडो इंटर फेस का दायरा एक्सपोट्‍​र्स तक बढ़ाने पर काम हो रहा है और अगले कुछ महीने में निर्यातकों के ज्यादातर क्लीयरेंस भी इसी पोर्टल के माध्यम से होंगे।
सीबीईसी के चेयरमैन नजीब शाह ने दिल्ली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी थी।
उन्होंने कहा, बीता एक साल निर्यातकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है मार्केट में हालात अब भी अच्छे नहीं हैं, लेकिन आपको जानकर खुशी होगी की इसी दौर में हम अपना बेस्ट देने की कोशिश कर रहे है।
पिछले फिसकल में दस वषो के मुकाबले सबसे ज्यादा ड्रॉ-बैक क्लीयर हुए हैं। कुछ पोर्ट पर यह भी ड्रॉ-बैक पेंडिंग नहीं रहा, जो रिकार्ड है। इस साल भी इसी तेजी से क्लीयरेंस हाेंगे। ड्रॉ-बैक एक तरह का रिफंड है, जो सरकार इनपुट या कच्चे माल पर दिये गए टैक्स के तौर पर उसे निर्यातकों को लौटा देती है।
उन्होंने बताया कि सरकार टे्रड फैसिलिटेशन बैठकों में छोटे निर्यातकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी काम कर रही है। सीबीईसी ने हाल ही में आयातकों के लिए सिंगल विंडो इंटरफेस फॉर फैसिलिटेशन ऑफ टे्रड नाम से एक पोर्टल शुरु किया है। जो कारोबारियों के लिए कॉमन इंटिग्रेटेड डिक्लेयरेशन जमा करने में मदद करेगा। इससे उन्हें 9 अलग-अलग फॅार्म भरने और करीब छह विभागों की मंजूरिया लेने से निजात मिल जाएगी। सीबीईसी के एक अन्य अधिकारी ने बताया की जल्द ही निर्यातकों को भी इस सिंगल विंडो सिस्टम के तहत लाया जायेगा। इससे उनके कई तरह की ट्रांजैक्शन लागत घटाने में मदद मिलेगी। इस मौके पर इंडिया टे्रड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन के सीएमडी एल सी गोयल ने कहा की ऑर्गनाइजेशन छोटे निर्यातकों को विश्व बाजार में जोड़ने में कारगर रहा है और सरकार उनके मार्केट एक्सेस को लेकर पहले से ज्यादा फिक्रमंद दिखती है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि एक्सपोर्ट पर एक हाई कमेटी ने निर्यात बढ़ाने के लिए एक छह सूत्री एजेंडे को लागू करने की सिफारिश की है इसमें एमएसएमई सेक्टर पर फोक्स और निर्यातकों की लम्बे समय से चली आ रही वह मांग भी शामिल है कि उन्हें लोन के मामले में प्रॉयोरिटी सेक्टर का दर्जा मिले।

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