ईमानदार अफसरों को इनाम मिलना चाहिए न की सेर्टिफिकेट

आज पूरे देश में जिस तरह से भ्रष्टाचार फैला हुआ है बिना रिश्वत के कोई काम नहीं हो रहा है। यह एक सोचने का विषय है अफसर भ्रष्ट क्यों है? आज जो भी शख्स सरकारी नौकरी में भर्ती होता है वह पहले से ही सोच लेता है कि रिश्वत लेनी है और घर भरना है, ज्यादातर अफसर ऐसी सोच रखते है। कुछ नये अफसर जो देशभक्ति की सोच कर किसी भी डिपार्टमेंट में भर्ती होते है जिनका असूल होता है, कि रिश्वत नहीं लेंगे। उनके माता-पिता भी नयी नौकरी लगने पर समझाते है कि रिश्वत मत लेना लोगों का काम करना। मगर वह जब देखते है कि रिश्वत लेने वाले दिन-रात तरक्की कर रहे है और वह बड़े अफसरों के चहेते भी है। हर तरह की सहुलियत और ऐशो-आराम उनके पास है तो वह भी इस होड़ में शामिल हो जाते है। पैसा देख कर बड़े-बड़ों का मन डोल जाता है। इसका एक ही हल है या तो भ्रष्ट अफसरों की सजा सख्त कर दी जाये जैसा की मोदी जी ने सीबीईसी चेयरमैन को कहा कि भ्रष्ट तथा निकम्मे अफसरों पर लगाम कसी जाये या कुछ ईमानदार अफसरों की डिपार्टमेंट में छंटाई की जाये। जो बिल्कुल यही चाहते है कि ईमानदारी से काम किया जाये उन्हीं को मलाईदार पोस्टिंग पर लगाया जाये और वह इन सीटों पर बैठ कर ईमानदारी से काम करें और सभी अफसरों के लिए उदाहरण पेश करें। आज कोई भी ईमानदारी का उदाहरण नहीं बनाना चाहता क्योंकि उसकी राह बहुत कठिन है। मगर मुश्किल भी नहीं है कि ऐसा हो न सके, जरुरत है विल पावर की। सरकार अपनी विल पावर दिखाये और ईमानदारी में परखे लोगों को ही पब्लिक डिलिंग वाली सीटों पर लगाये, जब अफसरों को पता चलेगा कि ईमानदारी में फायदा है। चलो पैसा नहीं तो नाम तो मिलेगा सरकार भी इन अफसरों के काम की हर साल समीक्षा करती रहे और इन ईमानदार अफसरों को अच्छे काम का बढ़ावा देने के लिए कुछ स्पेशल बड़े अवार्ड निकाले जिससे इनको लगे कि हम रिश्वत न लेते हुये भी सिक्योर है। इनकी लड़कियों की शादी का खर्च उठाया जाये बच्चों की एजुकेशन का कुछ अलग से पैकेज दिया जाये कहने का मतलब है कि सरकार ईमानदारी का कुछ इनाम रखे। तो मेरा यह मानना है कि सुधार हो सकता है। जब सभी को पता चलेगा की ईमानदारी से फायदा है तो अफसर ईमानदारी से काम करेंगे, इस तरह से फायदे के चक्कर में ईमानदारी के। बीज पैदा किया जा सकता है।

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