इम्पोर्ट -एक्सपोर्ट के लिए जरूरी होंगे अब सिर्फ तीन दस्तावेज

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने ईज ऑफ डुइंग बिजनेस की दिशा में काम करते हुए आयात-निर्यात के लिए जरूरी दस्तावेजों की संख्या घटाकर मात्र तीन कर दी है। अब कारोबारियों को सिर्फ एयरवेज बिल, कमर्शियल इनवॉयस और शिपिंग बिल की चिंता करनी होगी। इसके पहले उन्हें दर्जनों कागजात जमा या प्रोसेस कराने होते थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने गुरुवार को दस्तावेजों की संख्या तीन करने का नोटिफिकेशन जारी किया।
कॉमर्स मिनिस्ट्री ने डीजीएफटी की अगुवाई में जुलाई 2014 में एक इंटर-मिनिस्ट्रियल कमेटी गठित की थी। इसे आयात और निर्यात की ट्रांजैक्शन कॉस्ट घटाने के मकसद से जरूरी दस्तावेजों की संख्या न्यूनतम करने के लिए सुझाव देना था। कमेटी ने सभी स्टेक होल्डर्स और विभागों के साथ बैठकें की और अपनी रिपोर्ट दिसंबर में प्रधानमंत्री को सौंप दी थी।
डीजीएफटी के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कई दस्तावेजों को अब जरूरी लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। आरबीआई निर्यात के लिए फॉरेन एक्सचेंज कंट्रोल फॉर्म (एसडीएफ) की जरूरत खत्म करने पर सहमत हो गया। इसका डिक्लेयरेशन शिपिंग बिल में ही शामिल कर लिया गया है। इसी तरह आयात के लिए फॉर्म ए-1 की जरूरत खत्म कर इसे पैकिंग लिस्ट के साथ मर्ज कर दिया गया है। कस्टम विभाग भी कमर्शियल इनवॉयस को पैकिंग लिस्ट के साथ मर्ज करने पर राजी हो गया। शिपिंग मिनिस्ट्री इस बात के लिए राजी हो गई कि टर्मिनल हैंडलिंग रिसीट की जरूरत खत्म कर दी जाए।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अब एक्सपोर्ट के लिए बिलऑफ लैडिंग या एयरवे बिल में से कोई एक, कमर्शियल इनवॉयस कम पैकिंग लिस्ट, शिपिंग बिल या बिल ऑफ एक्सपोर्ट की जरूरत होगी। इसी तरह इम्पोर्ट के लिए बिल ऑफ लैडिंग या एयरवे बिल, कमर्शियल इनवॉयस कम पैकिंग लिस्ट और बिल ऑफ एंट्री की जरूरत होगी। अब तक कारोबारियों को आरबीआई, शिपिंग, कस्टम, बैंक और दूसरे विभागों की ओर से जारी होने वाले कम से कम एक दर्जन दस्तावेज लगाने या दिखाने पड़ते थे। डीजीएफटी की ओर से कहा गया है कि दस्तावेजों में कटौती के बाद आयात और निर्यात की ट्रांजैक्शन कॉस्ट घटाने में मदद मिलेगी और ईज ऑफ डुइंग बिजनेस का मकसद पूरा होगा।
स्रोत : इकनोमिक टाइम्स

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