इंसेंटिव ख़त्म करने से एक्सपोर्टर्स नाराज

कोच्चि  :  नई फॉरेन ट्रेड पॉलिसी में विकसित देशों को वैल्यू एडेड काली मिर्च के एक्सपोर्ट पर इनसेंटिव खत्म कर दिया गया है। निर्यातक इसका विरोध कर रहे हैं। वहीं, इमर्जिंग देशों के लिए यह रियायत अभी भी बनी हुई है। रॉ कमोडिटी पर इनसेंटिव नई पॉलिसी में दिया जा रहा है। इससे काली मिर्च का एक्सपोर्ट वियतनाम जैसे इमर्जिंग देशों को बढ़ रहा है, जहां दुनिया में सबसे ज्यादा इसकी पैदावार होती है। वहीं, अमेरिका और यूरोपीय देशों जैसे काली मिर्च के खरीदार देशों में इसके निर्यात में कमी आ रही है। न्यू मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत पहले वैल्यू एडेड काली मिर्च के एक्सपोर्ट पर मिल रहे 5 पर्सेंट इनसेंटिव को खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह कच्ची काली मिर्च के एक्सपोर्ट पर 3 पर्सेंट और इमर्जिंग मार्केट्स को निर्यात पर वैल्यू एडेड काली मिर्च के निर्यात पर 2 पर्सेंट का इनसेंटिव दिया जा रहा है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड को लिखे लेटर में स्पाइस बोर्ड के चेयरमैन ए जयतिलक ने कहा है कि भारतीय मसालों के लिए अमेरिका और यूरोप पारंपरिक तौर पर बड़े बाजार रहे हैं। इन देशों के निर्यात पर इनसेंटिव खत्म करने से इंडियन स्पाइस इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ेगा। इस सिलसिले में उन्होंने खास तौर पर वैल्यू एडेड मसालों का जिक्र किया है। उन्होंने मांग की है कि सभी देशों को वैल्यू एडेड काली मिर्च के एक्सपोर्ट पर 5 पर्सेंट का इनसेंटिव दिया जाना चाहिए। इस मामले में काली मिर्च के एक बड़े एक्सपोर्टर किशोर शामजी ने कहा, ‘नई फॉरेन ट्रेड पॉलिसी अप्रैल से लागू हुई है। तब से वियतनाम को काली मिर्च का एक्सपोर्ट बढ़ा है। वह प्रोसेसिंग के बाद इसे अमेरिका जैसे बाजारों में बेच रहा है। इसका मतलब यह है कि भारत में ट्रेड पॉलिसी बदलने से वियतनाम को फायदा हो रहा है। अगर हमने पॉलिसी नहीं बदली होती तो यह काली मिर्च हम सीधे अमेरिका को बेचते।’
स्पाइस बोर्ड के लेटर में कहा गया है कि यह पॉलिसी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के मुताबिक नहीं है। उसका कहना है कि भारत को काली मिर्च के एक्सपोर्ट मार्केट में वियतनाम, श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे देशों का मुकाबला करना पड़ता है, जो कम कीमत पर काली मिर्च बेचते हैं। इसलिए भारतीय काली मिर्च एक्सपोर्टर्स को ज्यादा इनसेंटिव की जरूरत है। इस बारे में ऑल इंडिया स्पाइसेज एक्सपोर्टर्स फोरम के चेयरमैन गुलशन जॉन ने कहा कि इनसेंटिव खत्म किए जाने से स्पाइस कैटेगरी में करीब 80 आइटम्स पर नेगेटिव असर हुआ है। इन चीजों पर या तो इनसेंटिव खत्म किया गया है या उनमें कमी की गई है। कुछ आइटम्स पर बिना वजह इनसेंटिव बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा, ‘हमें नहीं पता कि यह गड़बड़ी कैसे हुई। हम सरकार के सामने इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे।
source : ET

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