इंपोर्ट ड्यूटी 40% पहुंच सकती है शुगर पर

नई दिल्ली :  फूड मिनिस्टर रामविलास पासवान चाहते हैं कि शुगर पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 40 पर्सेंट कर दी जाए। इससे भारत की शुगर मिलों को फायदा होगा, जो अभी चीनी की कम कीमत के चलते मुश्किलों का सामना कर रही हैं। पासवान ने कहा कि मिलों की हालत सुधरने से वे किसानों को गन्ने का बकाया पैसा चुका पाएंगी।
12 राज्यों के किसान नेताओं से बुधवार को दो घंटे की मुलाकात के बाद पासवान ने कहा, ‘हम किसानों और मिलों की दिक्कतें दूर करने के लिए कई उपायों पर विचार कर रहे हैं। इस बारे में मैं फाइनेंस मिनिस्टर से चर्चा करूंगा।’ इस मीटिंग में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी और कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान भी शामिल हुए। पासवान ने कहा कि वह फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली को शुगर पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के लिए लेटर लिखेंगे। अभी चीनी पर इंपोर्ट ड्यूटी 25 पर्सेंट है। पासवान ने 16 अप्रैल को गन्ना किसानों की बकाया रकम के भुगतान के मामले पर चर्चा के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भी मीटिंग बुलाई है। पासवान ने 8 अप्रैल को बताया था कि चीनी मिलों पर किसानों का 19,243 करोड़ रुपया बकाया है। सबसे ज्यादा देनदारी यूपी की चीनी मिलों की है।
फूड मिनिस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी बढ़ने से चीनी का आयात कम होगा, जिससे यहां की मिलों की सेल्स बढ़ेगी। हालांकि, शुगर इंडस्ट्री का कहना है कि तत्काल राहत के लिए सरकार को खुद चीनी का स्टॉक तैयार करना चाहिए। अगर सरकार मिलों से चीनी खरीदेगी तो इससे उन्हें फौरी राहत मिलेगी। इस मामले में इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ए वेलियान ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि सरकार 25 लाख टन का बफर स्टॉक बनाए, जैसा कि चीन ने किया है। इससे किसानों को गन्ने का पैसा मिलता रहेगा और मिलों के पास उनका बकाया चुकाने की रकम आएगी।’
देश में 2014-15 सीजन में शुगर प्रॉडक्शन बढ़कर 2.65 करोड़ टन पहुंचने की उम्मीद है। पिछले साल यह 2.44 करोड़ टन रहा था। वहीं इसकी मांग 2.2 से 2.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है। चीनी की कम कीमत के चलते मिलों को किसानों का पैसा लौटाने में दिक्कत हो रही है। गन्ने की कीमत राज्य सरकारें तय करती हैं। मिलों का कहना है कि राज्य सरकारें इसका दाम ज्यादा रख रही हैं। इंटरनेशनल मार्केट में चीनी सस्ती हुई है। गन्ने की कीमत अधिक होने से भारतीय शुगर मिलों की लागत ज्यादा है, लिहाजा वे इसका एक्सपोर्ट नहीं कर पा रही हैं। हालांकि, अभी बहुत कम चीनी का आयात भी हो रहा है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक और किसान नेता वी एम सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मसले को सुलझाने के लिए एक्टिव रोल निभाना होगा।
स्रोत : इकनॉमिक टाइम्स

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